300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए। श्रमिक कोर लड़ाकू फौज से ज्यादा सुरक्षित है लेकिन महार लड़ाकू फौज में शामिल होना चाहते थे।
भारत में ब्रिटिश सरकार की तुच्छताओं में से एक लड़ाकू और गैर लड़ाकू वर्गों में यह भेदभाव है। इससे ज्यादा आपदाजनक कुछ नहीं है। बड़ी विडम्बना है कि ब्रिटिश सरकार को इस मूर्खतापूर्ण भेदभाव को मिटाने के लिए विवश करने के लिए युद्ध जैसी विराट आपदा आवश्यक थी। कहा जाता है कि सरकार महार बटालियन बनाने का निदेश दे चुकी थी। इसका श्रेय बम्बई के महामहिम राज्यपाल को जाता है। मेरी शिकायत करने पर उन्होंने केंद्र सरकार से संपर्क किया और उसमें सफलता प्राप्त की। मैं महारों से अपील करता हूं कि मौके का फायदा उठाएं अपने स्वयं के लिए और देश के लिए तथा ब्रिटिश सरकार से भी अपील करता हूं कि महारों पर भरोसा रखें और युद्धोपरांत उन्हें सेना से बेदखल न करें !
बम्बई डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ख्1,
- द टाइम्स ऑफ इंडिया तारीख 18 जून, 1941