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बम्बई सरकार ने महार वतनों पर अतिरिक्त कर लगा दिया। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर उस समस्या से 1927 से जूझ रहे थे। लेकिन अब सरकार ने कृषि दास प्रथा से गरीबों को छुटकारा देने के बजाए अतिरिक्त कर लगाकर उनके घाव पर नमक छिड़क दिया। महाराष्ट्र और कर्नाटक के महार, मंग और वेठिया लोगों ने अपनी व्यथा को प्रकट करने के लिए दिसम्बर, 1939 के मध्य में, अहमदनगर जिले के हरेगांव में, डॉ. अम्बेडकर की अध्यक्षता में एक सम्मेलन आयाजित किया।’’ ख्1,
20,000 महार, मंग और वेठिया लोगों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए 16 सितम्बर, 1939 को डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने आश्वासन दिया कि मैं आपकी शिकायतों के संबंध में सरकार को अभ्यावेदन प्रस्तुत करूंगा। तद्नुसार उन्होंने तारीख 14 जुलाई, 1941 को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जो निम्न प्रकार है- संपादक
सेवा में,
महामहिम सर रोजर लुमली,
जी. सी. एम. आई. ई., टी. डी. गवर्नर,
बम्बई,
महामहिम के समक्ष विनम्र प्रार्थना
इस प्रेसिडेन्सी में निम्न ग्रामसेवक के रूप में ज्ञात वतनदार महारों, मंगों और वेठियाओं की शिकायतों के संबंध में निम्नलिखित विनम्र अभ्यावेदन विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत करता हूं। कृपया महामहिम महोदय, इस पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करें -
- ये शिकायतें निम्न ग्राम सेवक नामक वतनदारों के बारे में बम्बई सरकार
द्वारा शुरु की गई नई नीति के कारण उत्पन्न हुई हैं। ये दो महत्वपूर्ण
विषयों के संबंध में हैं, अर्थात् -
( i ) उनके पारिश्रमिक में भारी कटौती, और
( ii ) उनके काम में पर्याप्त वृद्धि।
1- कीर. पृ. 330 -331 ।