302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
- उनके पारिश्रमिक के विषय में नई नीति इस धारणा पर बनाई गई है
कि ग्राम महारों का पारिश्रमिक बहुत ज्यादा है और उसे कम किया जाना
चाहिए। निदेश दिया गया था कि या तो उनकी इनाम भूमि पर जूड़ी
(नकद लेवी) लगाकर ऐसा किया जा सकता है जहां वह पहले नहीं है
अथवा जहां जूड़ी पहले से लगी हुई है वहां उसे बढ़ाकर ऐसा किया जा
सकता है।
- उनके काम (ड्यूटी) के बारे में बम्बई सरकार ने राजस्व विभाग में तारीख
13.09.1938 का एक सरकारी संकल्प सं. 7420/33 जारी किया जिसमें
उनकी ड्यूटियों का उल्लेख किया गया था। उसके बाद महार, मंग और
वेठिया लोगों से संकल्प संख्या 19 में बताई गई ड्यूटी करना अपेक्षित
किया गया था।
- इस नीति के अन्याय के विरोध में, महारों, मंगों और वेठियाओं का एक
सम्मेलन मेरी अध्यक्षता में 16 नवम्बर, 1939 * को अहमदनगर जिले के
हरेगांव में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में कुछ संकल्प पारित
किए गए थे। ये संकल्प अनुकूल विचार के लिए तथा महामहिम की सरकार
द्वारा आवश्यक आदेश जारी किए जाने के लिए महामहिम की सेवा में भेज
दिए गए थे। आपकी सुविधा के लिए उक्त संकल्पों की प्रतियां परिशिष्ट- I
के रूप में संलग्न हैं।
- ये संकल्प 7 जून, 1940 को आयोजित बैकवर्ड क्लास बोर्ड की बैठक में विधायक
श्री बी. के. गायकवाड़ द्वारा भी पेश किए गए थे। इन मदों से संबंधित बैठक
के कार्यवृत्त की प्रतिलिपियां परिशिष्ट- II के रूप में यहां संलग्न हैं।
- परम आदर के साथ, मैं यह कहने के लिए विवश हूं कि सरकार ने उक्त
सम्मेलन द्वारा पारित संकल्पों पर सम्यक विचार नहीं किया है। संकल्प प्रस्तुत
करने के बाद डेढ़ वर्ष से भी अधिक समय बीत गया है लेकिन फिर भी जूड़ी
उगाहने के बारे में या उन बाध्यताकारी कार्यों की लंबी सूची के पुनरीक्षण के
बारे में जो निम्न ग्राम सेवकों द्वारा किए जाने अपेक्षित हैं, सरकार की नीति में
कोई फेर-बदल अभी तक नहीं किया गया है। इसके विपरीत, जूड़ी वसूलने
की नीति बराबर चालू हैं और निम्न ग्राम सेवकों के दरिद्र परिवारों और गरीब
लोगों के बर्तन-भांडे भी न्यायालय के आदेश से कुर्क किए जा रहे हैं और
इनमें से बहुत से परिवार बिल्कुल असहाय बना दिए गए हैं।
* . माह दिसम्बर के रूप में पढ़ा जाए - जनता : 9 और 23 दिसम्बर, 1939 ।