खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 32

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संख्या एच/3477

दिनांक 22 दिसम्बर, 1927

सेवा में,

डी.एस.पी.

कोलाबा, अलीबाग

श्रीमान,

संदर्भ : बी.एस.ए. कॅरेंट का पैरा 868।

इस संबंध में दलित वर्गों की एक बैठक 21 दिसम्बर की रात को हुई थी जिसमें डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, बार-एट-लॉ ने लगभग 250 लोगों की सभा की अध्यक्षता की थी। अध्यक्ष, सम्भाजी, सन्तोजी वाघमा रे, निमदारकर, खोलवाडेकर और जुन्नारकर ने भाषण दिए जिनमें लोगों को सलाह दी गई कि वे अछूतों द्वारा पानी के तालाब के उपयोग पर पाबंदी के विरुद्ध इस माह की 25 तारीख को महाद में होने वाले सत्याग्रह आंदोलन में शामिल हों।

(हस्ताक्षर)

डी.सी.पी.एस.बी.

22 दिसम्बर,1927 ख्1,

इसी बीच, महाद नगरपालिका ने 4 अगस्त, 1927 को वर्ष 1924 के अपने उस संकल्प को रद्द कर दिया जिसके अंतर्गत उसने दलित वर्गों के लिए चौदार टैंक को खुला घोषित किया था। डा. अम्बेडकर ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 11 सितम्बर को दामोदर हॉल, बंबई में एक सार्वजनिक बैठक में, दलित वर्गों के महाद तालाब के अधिकार को पुनः स्थापित किए जाने को सफल बनाने के उपाय ढूंढ़ने तथा तारीख और ब्यौरे निर्धारित करने के लिए एक समिति बनाई गई। चार दिन बाद डॉ. अम्बेडकर के कार्यालय में समिति की बैठक हुई और उसने 25 और 26 दिसम्बर, 1927 को सत्याग्रह करने की तिथियां घोषित कीं।

महाद में प्रस्तावित सम्मेलन और सत्याग्रह का दिन नजदीक आ रहा था। महाद

  1. स्रोत सामग्री, खंड 1, पृष्ठ 13-14।