304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भी पहले कभी सेवा के लिए अपेक्षित नहीं रहे। ताल्लुका अधिकारियों ने ग्राम पाटिल का पक्ष लिया और रजिस्टर में अंकित महारों की पूरी संख्या पूरे समय ड्यूटी पर रहने की मांग की। व्यवहार में इसका अर्थ यह हुआ कि गांव के महारों की पूरी जनसंख्या सरकारी सेवा के लिए लगा दी गई। किन्तु महारों ने इस अतिशय और अनुचित मांग को मानने से मना कर दिया। रजिस्टर में वर्णित समस्त महारों के लिए पूरे समय ड्यूटी देना संभव नहीं था क्योंकि उन्हें जो इनाम जमीन दी गई थी उससे होने वाली आय उन सबके पालन-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं थी, उन सभी को और अधिकांश महारों को अपनी आजीविका के लिए छोटा-मोटा दूसरा काम करना पड़ता था। इसलिए वतनदार महारों ने स्थानापन्न महारों की संख्या घटाकर वतन रजिस्टर को ठीक करने के लिए आंदोलन चलाया। इसमें वे कामयाब रहे और महारों की संख्या घटा दी गई। लेकिन जैसाकि मैं कह चुका हूं स्थानापन्न महारों की संख्या कम नहीं की गई। यह तो गलत अभिलेख में सुधार मात्र था। इसे संख्या में कमी करना या तो तथ्यों को भूलना है या उन्हें गलत समझना है। जो हुआ वह था गलत वतन रजिस्टर में सुधार। ऐसी स्थिति में, मैं समझ नहीं सकता कि सरकार जूड़ी लगाकर या जूड़ी बढ़ाकर महारों के पारिश्रमिक में कमी करने की अपनी नीति को उस आधार पर न्यायोचित कैसे ठहरा सकती है।
बहराल, यदि यह मान लिया जाए कि स्थानापन्न महारों की संख्या कम की गई है तो भी ऐसी धारणा को जो तथ्य परक नहीं हो, मेरा सादर निवेदन है, समझना आसान नहीं है कि सरकार, उस आधार पर, जूड़ी अधिरोपित करके या जूड़ी में वृद्धि करके उनके पारिश्रमिक को कैसे कम कर सकती है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है, कि इस उपाय को अपनाकर इस महत्वपूर्ण परिस्थति को बिल्कुल भी ध्यान में नहीं रखा गया जिसका विवादित मुद्दे से गहरा संबंध है अर्थात् वतन संपत्ति एक विशेष वर्ग में आती है तथा यद्यपि इसे पारिश्रमिक कहा जा सकता है फिर भी ’काम नहीं वेतन नहीं’ अथवा ‘जितना काम उतना वेतन’ का नियम सरकार द्वारा वतनदारों और उनके वतनों के संबंध में कभी भी लागू नहीं किया गया है।
इस संबंध में महामहिम का ध्यान निम्नलिखित तथ्यों की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं जो यह दर्शाते हैं कि वैसी परिस्थितियों में दूसरे वतनदारों के साथ सरकार द्वारा कैसा व्यवहार किया गया है। जब अंग्रेजों ने देश के इस भू-भाग पर कब्जा किया तो उन्होंने देखा कि महाराष्ट््र सरकार ने प्राईवेट