306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय क. गैर-सेवा इनाम
- संक्षिप्त व्यवस्थापन अधिनियिम (अर्थात् समरी सेटलमेंट एक्ट्स) के प्रावधान
ईनाम के केवल दो वर्गों : (1) वैयक्तिक और (2) देवस्थान इनाम, को
अर्थात् गैर-सेवा इनामों पर लागू होते थे। सेटलमेन्ट एक्ट्स में अंतर्निहित
मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित थे -
(क) समस्त वैयक्तिक इनामों का (जिन्हें वर्षासन भी कहते थे) चाहे
उन पर निर्णय इनाम आयोग द्वारा किया जाए या नहीं, अंतरणीय
फ्रीहोल्ड में परिवर्तन,
(ख) ऐसे संख्या परिवर्तन के लेखे ऐसी जमीनों पर क्विट रेन्ट या नजराना
लगाना जिसकी रकम नियत थी :
( i ) 1843 के अधिनियम सं. II द्वारा, पूरे निर्धारण पर 4 आना प्रति
रुपया की दर से जमा रुपये में अतिरिक्त 1 आने के बराबर
नजराना, और
( ii ) 1863 के अधिनियम सं. VII, द्वारा, नजराने के बिना रुपये में
दो आना की दर से।
- इन अधिनियमों के द्वारा किए गए व्यवस्थापन के द्वारा पूरा निर्धारण करने
के अधिकार को छोड़ने के फलस्वरूप सरकार को हुई वार्षिक हानि की
मात्रा किसी भी तरह कम नहीं थी जैसाकि निम्न आंकड़ों से स्पष्ट हो
जाएगा :- वैयक्तिक और देवस्थान इनाम के रूप में धारित गैर-सेवा इनाम भूमि पर
मंडल अन्य संक्रामित भूमियों पर
निर्धारण ऋण क्विट्ेरेन्ट (जूड़ी)
रुपये आना पैसे आना
पैसे
रुपये
I. उत्तरी मंडल....... 1,26,529 15 1
II. मध्य मंडल............ 2,86,292 2 3
III. दक्षिणी मंडल........ 2,02,827 3 6
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