27. वतनदार महारों, मेंगों आदि की शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन। - Page 324

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  1. जैसाकि ऊपर बताया जा चुका है, समरी सैटलमेंट एक्टां के प्रावधान केवल

गैर-सेवा इनामों अर्थात् वैयक्तिक इनामों और देवस्थान इनामों पर ही लागू

होते थे। वे सेवा इनामों अर्थात् राजनीतिक इनामों और गैर-राजनीतिक इनामों

पर लागू नहीं होते थे। ये इनाम उनके प्रवर्तन से अभिव्यक्त रूप से बाहर

रखे गए थे और इनके संबंध में कार्रवाई पृथक् रूप से की जाती थी।

ख. सेवा इनाम

  1. (1) राजनीतिक इनाम : इन इनामों में जागीर और सरन्जाम नामक इनामों

का वर्ग शामिल था। ये असैनिक (नागरिक) और सैनिक सेवाओं के लिए

राज्य द्वारा दिए गए अनुदान थे, अथवा नोबेलों और उच्च अधिकारियों

की, जिन्होंने अतीत में राज्य की सेवा की है, गरिमा बनाये रखने के लिए

राज्य द्वारा दिए गए अनुदान थे। इन राजनीतिक इनामों का व्यवस्थापन

ब्रिटिश सरकार द्वारा वैयक्तिक इनामों के व्यवस्थापन के सिद्धांत पर

किया जाता था अर्थात् ये उस तारीख के अनुसार जिसको मूल अनुदान

दिया गया था, एक या अधिक पीढि़यों तक वंशानुगत चलते रहते हैं,

यद्यपि उन पर सरकार की सेवा करने की बाध्यता से छूट प्राप्त होती है।

परिणामस्वरूप ये सरन्जामदार सरकार की किसी भी प्रकार की सेवा किए

बिना सरकारी खजाने से नकद भत्ते के रूप में अनुदान प्राप्त करते हैं।

सरन्जाम के कारण सरकार को हुई हानि सरकारी खजाने में से सरन्जामदारों

को प्रतिवर्ष दिए गए नकद भत्तों के कारण होती है। निम्नलिखित तालिका

इस कारण सरकार को होने वाली वार्षिक हानि दर्शाती है :-

सरन्जामों के कारण सरकार को होने वाली वार्षिक हानि

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जिला सरन्जामदारों के नकद भुगतान

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सरन्जामदारों के नकद भुगतान

जिला

रुपये आना पैसे आना

पैसे

रुपये

पूना 34,091 11 11 शोलापुर 10,451 13 9 अहमदनगर 30,590 12 5 सतारा 25,447 9 3

खंडेश 38,714 5 5 बीजापुर 11,738 12 1