27. वतनदार महारों, मेंगों आदि की शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन। - Page 327

310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

थे जैसे कुम्हार, सूतार आदि जो आज भी गांव के समाज की सेवा करते

हैं। उनके मामले में किया गया व्यवस्थापन निम्न प्रकार था-

( i ) पुराने प्रांतों में - सेवा समाज के लिए ज्यादा उपयोगी है या कम

इस आधार पर धारित भूमि का निर्धारण, सर्वेक्षण निर्धारण की आधी

या चौथाई दर पर किया जाता था।

( ii ) नये प्रांतों में - धारित भूमि का निर्धारण, निर्धारण की आधी दर

पर किया जाता था।

ग्राम अधिकारयिं के इस वर्ग की भूमि सेवा की शर्त पर धारित होती थी।

इसलिए वह अंतरणीय नहीं होती थी।

  1. इस वर्ग के ग्राम सेवकों के साथ किए गए व्यवस्थापन के कारण सरकार

को होने वाली वार्षिक हानि नीचे दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट होगी :-

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संराशीकरण के फलस्वरूप समाज के लिए उपयोगी ग्राम सेवकों द्वारा धारित

आना

पैसे

रुपये

  1. उत्तरी मंडल ............ 79,177 0 0

  2. मध्य मंडल ................. 72,343 5 1

  3. दक्षिणी मंडल ............. 64,256 15 3 2,15,777

  4. सरकार के लिए उपयोगी ग्राम अधिकारीगण : इनमें निम्नलिखित तीन वर्ग

शामिल थे - (1) पाटिल, (2) कुलकर्णी और (3) महार। 26. जहां तक इन ग्राम अधिकारियों का संबंध है, वे सेवा करने की बाध्यता

से मुक्त नहीं होते थे। उनके साथ वैसा संराशीकरण नहीं किया जाता था

जैसा दूसरे वंशानुगत अधिकारियों की दशा में किया जाता था। इसका

कारण स्पष्ट था। वे प्रशासन तंत्र के अनिवार्य अंग थे। वे ब्रिटिशों के लिए

उतने ही अपरिहार्य थे जितने वे इससे पहले पेशवा सरकार के लिए थे। 27. इस सर्वेक्षण से निम्नलिखित तथ्य सामने आते हैं :-

( i ) वैयक्तिक और देवस्थान इनामधारक राज्य की कोई सेवा नहीं करते