312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पक्षपात और अन्याय सिद्ध करने के लिए मैं विनम्रतापूर्वक कुलकर्णी वतन की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करता हूं। कुलकर्णी वतन, सरकार के लिए उपयोगी ग्राम सेवकों के वतन सम्पत्ति के वर्ग में आते हैं। इस वर्ग में तीन वतन संपत्तियां आती हैं। वे हैं - (1) पाटिल, (2) कुलकर्णी, और (3) महार की संपत्तियां। वंशानुगत वतन के रूप में कुलकर्णी वतन 1914 तक बना रहा। 1914 में, सरकारी संकल्प सं. 5070 तारीख 30 मई, 1914 के द्वारा कुलकर्णी संपत्ति संराशीकृत कर दी गई और कुलकर्णी को सरकार की सेवा प्रदान करने की बाध्यता से मुक्त कर दिया गया। जिन शर्तों पर यह संराशीकरण हुआ था वे निम्न प्रकार थीं -
(1) आकरनी (भू-राजस्व संग्रहण का पारिश्रमिक) के एक-तिहाई
के बराबर नकद भत्ते की, प्रतिनिधि वतनदारों, उनके पारंपरिक,
संपार्श्विक, या दत्तक वारिसों को जब तक पारंपरिक, संपाशि्र्वक या
दत्तक वतन का कोई पुरुष वारिस विद्यमान रहें, शाश्वत अदायगी
और सन् 1913-14 के लिए अदा की गई पोटगी।
(2) वर्तमान भू-धारकों और उनके पारंपरिक या दत्तक वारिसों के तब
तक सभी वतन भूमियों को सतत रखना जब तक कोई पारंपरिक,
संपार्श्विक या दत्तक पुरुष वारिस विद्यमान रहे जो वर्तमान जूड़ी
की अदायगी की शर्त के अधीन होगा और जब यह राशि पूरी
निर्धारण रकम से कम होगी तो अतिरिक्त रकम, जो पूरी निर्धारण
रकम की 1/16 से अधिक न हो, जो इस शर्त के अधीन होगी
कि वर्तमान जूड़ी समेत अतिरिक्त लेवी (उद्ग्रहण) तत्समय भूमि
पर पूरी निर्धारण रकम से अधिक नहीं होगी।
(3) भूमि हेयरडटिरी विलेज आफिसेज एक्ट की धारा 10, 11, 11क
और 12 के प्रावधानों के दायित्वाधीन होगी, किन्तु उसे कलक्टर
द्वारा इन धाराओं के प्रवर्तन से बाहर रखा जा सकेगा।
(4) नकद भत्ते एवं वतन भूमियां तब तक बनी रहेंगी जब तक कि
भू-धारक ब्रिटिश सरकार की निष्ठावान प्रजा बने रहेंगे।
(5) एक रुपये का आंशिक भाग (भिन्न) उसके मूल्य के बीस गुणा राशि
पर अनिवार्यतः खरीदना होता है और जब वह आंशिक भाग 14
आने या अधिक होता है तो प्राप्तिकर्ता रुपया पूरा करने के लिए
उस अंतर को बीस गुणा राशि पर खरीद सकेगा।