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अपनाई गई नीति पॉल को देने के लिए पीटर को लूटने की नीति से भी
खराब है तथा सरकार की घोषित नीति के प्रतिकूल है तथा वतन एक्ट
के प्रावधानों के विपरीत है।
- जूड़ी बढ़ाने के विषय पर अनेक सरकारी संकल्प हैं जिनमें वे निबंधन
और शर्तें निर्धारित की गई हैं जिनके अधीन सरकार ने जूड़ी बढ़ाने के
अधिकार को आरक्षित रखा है। कर्नल डब्ल्यू. सी. एन्डरसन, सर्वेक्षण और
बंदोबस्त आयुक्त, नई दिल्ली द्वारा राजस्व विभाग में सरकार के मुख्य
सचिव को संबोधित पत्र तारीख 23 जुलाई, 1877 में उनका हवाला दिया
गया है, सारांश दिया गया है, उन्हें स्पष्ट किया गया है। उसे आर. जी.
गोर्डन, आई. सी. एस. द्वारा बम्बई सर्वे सैटलमेंट मैनुअल जिल्द- II के
पृष्ठ 496-505 पर परिशिष्ट IV(c) के रूप में मुद्रित किया गया है।
- ऐसा प्रतीत होता है कि बम्बई सरकार के तारीख 1 नवंबर, 1875 के इस
संकल्प सं. 6141 में अंतर्निहित सिद्धांत के बारे में कुछ संदेह था जिस
जूड़ी बढ़ाने के बारे में सरकार की स्थिति दी गई थी। कर्नल एन्डरसन
ने उसे स्पष्ट करना आवश्यक समझा। अपने पत्र के पैरा 4 में उनके
द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण नीचे उद्धृत है -
’’4. तारीख 1 नवम्बर, 1875 के सरकारी संकल्प सं. 6141 का
सिद्धांत स्पष्ट है - आशय समय-समय पर नियत अधिकारियों के पारिश्रमिक
के अंतिम रुपये पर लागू वतन के वेतन को कायम रखना था, लेकिन
(वतन के) अधिशेष वेतन में से धन कमाने की वांछा नहीं थी। (मेरे द्वारा
रेखांकित) .................।’’
- जहां तक सर्वे सैटलमेंट मैनुअल का प्रश्न है, कर्नल एंडरसन द्वारा दी
गई 1875 के संकल्प की इस व्याख्या पर विवाद करते हुए सरकार
द्वारा बाद में कोई संकल्प नहीं निकाला गया और न ही ऐसा कोई संकल्प
पारित किया गया जो 1875 के संकल्प के निबंधनों को उपांतरित करता
हो। ऐसी स्थिति में, 1875 का संकल्प और कर्नल एंडरसन द्वारा की गई
उसकी व्याख्या जूड़ी बढ़ाने के सवाल पर सरकार की अंतिम और बाध्यकर
उद्घोषणा है। अतः मेरा निवेदन है कि मेरा यह कहना उचित है कि दूसरे
वतनदारों को पारिश्रमिक देने के लिए महार की वतन जमीनों की जूड़ी में
की गई वर्तमान वृद्धि उल्लिखित संकल्प का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
- संकल्प में जूड़ी बढ़ाने की शक्ति पर दो सुभिन्न प्रतिबंध लगाए गए हैं। वे