27. वतनदार महारों, मेंगों आदि की शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन। - Page 341

324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वतन पर लागू होता है और उन्हें सरकार तथा ग्राम समाज की सेवा करने की बाध्यता से मुक्त किया जाए।

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यह सम्मेलन सरकार की जानकारी में लाना चाहता है कि प्रेजिडेन्सी में ऐसे अनेक गांव हैं जिनमें महारों को मुफ्त सेवा प्रदान करने के लिए बाध्य किया जाता है। साथ ही सम्मेलन इस बात पर जोर देता है कि सरकार के लिए यह आवश्यक और अत्यावश्यक है कि वह निम्न ग्रामसेवकों को पारिश्रमिक दिया जाना सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर ले। सम्मेलन इस मौके पर सरकार को चेता­ वनी देता है कि यदि इस दिशा में छह माह में कोई कदम नहीं उठाए गए तो यह सम्मेलन ऐसे महारों को सरकार को कोई सेवा प्रदान करने से मना करने के लिए बाध्य होगा।

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यह सम्मेलन सरकार से सिफारिश करता है कि इस प्रांत के राजस्व अधिकारियों द्वारा पारित निलम्बन आदेश और जुर्माने को पुनरीक्षित करने के लिए तथा इस समिति के फैसलों के अनुसार ऐसे आदेश को कार्यरूप देने के लिए प्रांतीय विधानमंडल में वतनदार महारों के प्रतिनिधियों की एक समिति बनाई जाए।

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यह सम्मेलन बम्बई विधानसभा में अनुसूचित जाति के सदस्यों को प्राधिकृत करता है कि वे इस सम्मेलन में व्यक्त वतनदार महारों और मंगों की शिकायतों का अभ्यावेदन देने के लिए बम्बई के महामहिम गवर्नर के समक्ष उपस्थित हों।

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सम्मेलन द्वारा पारित संकल्पों को आवश्यक प्रभावी रूप देने के लिए यह सम्मेलन निम्नलिखित सज्जनों की एक समिति नियुक्त करता है और साथ ही यह सम्मेलन सलाह देने और ऐसी कार्रवाई करने के लिए जैसे संकल्प के उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए आवश्यक हो, समिति को सशक्त करता है।