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परिशिष्ट-
बम्बई के सचिवालय में सलाहकार कक्ष II में तारीख 7 जून, 1940
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को प्रातः 11 बजे आयोजित 23वें पिछड़ा वर्ग बोर्ड की बैठक के
कार्यवृत्त से उद्धृत अंश
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यह बोर्ड महार इनाम जमीनों पर जूड़ी बढ़ाने की नीति जो बम्बई प्रांत में हाल में लागू की गई है, का कड़े शब्दों में विरोध करता है। इस नीति के द्वारा पहले ही गरीबी की मार झेल रहे वतनदार महारों, मंगों और वेठियाओं पर जूड़ी में अत्यधिक वृद्धि की गई है। उसकी मांग है कि इस नीति को तुरंत वापस लिया जाए और उसके अधीन वसूली जाने वाली लेवी रद्द की जाए क्योंकि यह नीति हेयरडिटेरी विलेज आफिसेज एक्ट में अंतर्निहित सिद्धांतों के प्रतिकूल है तथा कठोर और अनुचित भी है। श्री बी. के. गायकवाड़ के प्रस्ताव सं. 2 पर चर्चा हुई और उसे मामूली फेर-बदल करके संकल्प सं. 7 के रूप में, अंगीकार किया गया। दैनिक भत्ते की दर के संबंध में सुझाव दिया गया कि महार और वेठिया को जब कभी सरकारी काम करने के लिए उनके गांव से बाहर भेजा जाए तो उन्हें 6 आने दैनिक भत्ता दिया जाना चाहिए।
(श्री बी. के. गायकवाड़)
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यह बोर्ड संकल्प करता है कि राजस्व विभाग के सरकारी संकल्प सं. 7420/33, तारीख 13.9.1938 में उन कार्यों की सूची दी गई है जो महारों, मंगों और वेठियाओं को करने होते हैं। यह उन पर असह्य बोझ डालता है जो उनके वतनदारों के लिए सहन करना असंभव है। इसलिए बोर्ड की राय है कि इन वतनदारों से दैनिक मज दूरी के रूप में अतिरिक्त पारिश्रमिक अदा किए बिना मद सं. 1, 3, 5, 9, 13 और 19 पर सूचीबद्ध कार्य करने की अपेक्षा न की जाए। जब कभी उनसे इन कार्यों को करने की अपेक्षा की जाए तो उन्हें कम से कम छह आने दिए जाएं :-
(क) बोर्ड की राय है कि वतनदारों को ड्यूटी सं. 15 करने से छूट दी जाए
क्योंकि बोर्ड की राय में यह ऐसी ड्यूटी है जो पुलिस द्वारा की जानी
चाहिए।
(ख) बोर्ड की राय है कि ड्यूटी सं. 2 खातेदारों की ’’बटकी’’ या ’’डवंडी’’ बुलाने