33. हिन्दुत्व वैसे ही स्वरूप की राजनीतिक विचारधारा है जैसी फासिस्ट और/या नाजी विचारधारा है - Page 356

339

33
हिन्दुत्व वैसे ही स्वरूप के जैसा ....... है, राजनीतिक विचारधारा है
Col1 Col2
Lo :i
Col1 Col2
Col1 Col2 Col3 Col4 Col5
fopkjèkk Col2

एक वक्तव्य में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने कहा है -

जनरल चियांग काई-शेक ने ब्रिटिश शासन से अपील की है कि भारत के लोगों को वास्तविक राजनीतिक सत्ता, उनकी ओर से मांगों का इंतजार किए बिना, यथासंभव शीघ्र सौंप दी जाए। लेकिन उन्होंने उन कठिनाइयों का कोई हल नहीं बताया है जो ऐसे समापन के रास्ते में आ रही हैं। कठिनाई कांग्रेस द्वारा वायसराय की अगस्त घोषणा के इस मूल तत्व को स्वीकार न किए जाने से पैदा हुई है कि भारत के भावी संविधान पर भारत के राष्ट्रीय जीवन के कुछ महत्वपूर्ण घटकों की सहमति अवश्य ली जानी चाहिए। कांग्रेस किसी भी स्वस्थचित्त व्यक्ति से जो भारत में विद्यमान हालात के बारे में कुछ भी जानता है यह उम्मीद नहीं कर सकती कि वह देश का शासन मात्र इसलिए हिंदू बहुसंख्यकों को सौंपने के लिए राजी हो जाए कि वे बहुसंख्यक हैं। कांग्रेस यह भूल जाती है कि हिन्दुत्व वैसे ही स्वरूप की राजनीतिक विचारधारा है जैसी फासिस्ट और/या नाजी विचारधारा है और वह पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी है। यदि हिन्दुत्व को बढ़ावा दिया गया जैसाकि हिन्दुत्व बहुसंख्यक से अभिप्रेत है, तो इससे दूसरे लोगों की जो हिन्दुत्व से बाहर हैं और हिन्दुत्व के विरोधी हैं, प्रगति पर कठोराघात होगा। अकेले मुस्लिमों का ही यह दृष्टिकोण नहीं है, दलित वर्गों का एवं गैर ब्राह्मणों का भी यही दृष्टिकोण है।

izfrdkjd ek Col2
izfr kj

मेरे विचार में, ब्रिटिश सरकार के लिए निम्नलिखित घोषणा करना संभव हैः-

(1) प्रस्ताव है कि भारत को शांति की तारीख से तीन वर्ष के भीतर डोमिनियन

स्थिति दी जाए।

(2) उस लक्ष्य की शीघ्र पूर्ति के लिए भारत के राष्ट्रीय जीवन के घटकों से

अपेक्षित होगा कि वे अपने सांविधानिक मतभेदों को दूर करने के लिए

सहमति से किया गया समाधान विराम संधि पर हस्ताक्षर करने की तारीख

से एक वर्ष के भीतर प्रस्तुत करें।

(3) सहमति न होने पर ब्रिटिश सरकार विवाद को फैसले के लिए अंतरराष्ट्रीय

अधिकरण को प्रस्तुत करे, और