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ल्ेकिन मैं मुस्लिम समुदाय के लिए 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की मांग नहीं समझ सकता। न ही मैं यह समझ सकता हूं कि यह 50 प्रतिशत की तुरंत मांग पाकिस्तान की अंतिम मांग से किस प्रकार संबद्ध है। मुझे विश्वास है कि मुस्लिम लीग की यह मांग एक भयंकर चीज है और मुझे कोई संदेह नहीं है कि लार्ड लिंलिथगो ने इसे नामंजूर करके भारत की बहुत बड़ी सेवा की है।
निश्चय ही, मेरी राय है कि भारत में अंतरिम व्यवस्था के रूप में कोई राष्ट्रीय सरकार स्थापित नहीं होनी चाहिए, यदि इसका अर्थ है जिन्ना की 50 प्रतिशत की मांग को मान लेना। आखिरकार मैं यह विश्वास नहीं कर सकता कि राष्ट्रीय सरकार युद्ध के विषय में उससे ज्यादा क्या कर सकती है जितना किया जा रहा है। गलती पूरी तरह ब्रिटिश सरकार की है। उन्होंने शांतिकाल में भारत में संसाधनों को विक सित करने का रास्ता नहीं अपनाया। इसलिए सरकार के लिए या राष्ट्रीय सरकार के लिए जो कुछ किया जा रहा है उससे अधिक करना असंभव है। यदि वह पूरी तरह विकसित हो जाती तो वह साम्राज्य की रक्षा कर सकती थी। अब वह अपनी रक्षा नहीं कर सकती। उसे सन्निकट जापानी आक्रमण से अपनी रक्षा करने के लिए इंग्लैंड की ओर देखना होगा, वस्तुतः वह देखने के लिए बाध्य है। ऐसी है उसकी असहाय अवस्था। रक्षा मंत्री के रूप में भारतीय की नियुक्ति अच्छी बात हो सकती * है लेकिन क्या इतना काफी है ? यह समझना कठिन है कि रक्षा साधनों के बिना भारतीय रक्षा मंत्री क्या कर सकता है।
मुझे यह सोचना चाहिए था कि भारतीयों के लिए अधिक बुद्धिमत्तपूर्ण रास्ता यह होता कि वे इंग्लैंड से रक्षा के साधन भारत में भेजने के लिए कहते। इसी में भारत का तात्कालिक हित निहित है और इसमें इंग्लैंड का कर्तव्य भी निहित है। - ए. पी’’ ख्1,
- द बम्बई क्रोनिकल, तारीख 26 फरवरी, 1942।