34. हम राष्ट्रीय जीवन में पृथक तत्व हैं। - Page 360

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डॉ. अम्बेडकर (एम. ए. लंदन) * की गंदगी; डॉ. अम्बेडकर (कोलम्बिया विश्वविद्यालय में उच्च सम्मान) की लाज-शरम, डॉ. अम्बेडकर (हीडलवर्ग में विशेष डिस्टिंकशन) की आफत और विपत्ति से मुक्त होकर उनकी आत्मा निर्मल और अजर-अमर हो जाए।’ (पृ. 30)

डॉ. अम्बेडकर ने मुझ से कहा - ’मेरी नीति का मूलाधार यह है कि हम हिन्दुओं के अधीन नहीं हैं बल्कि हम राष्ट्रीय जीवन में एक पृथक घटक हैं।’

’गांधी हमसे कहते हैं ’’हम पर भरोसा करो - सवर्ण हिन्दुओं पर भरोसा करो’ ! मेरा उत्तर - ’हम आप पर भरोसा नहीं करेंगे क्योंकि आप हमारे खानदानी दुश्मन हैं।’

’हर गांव में अछूतों की कम आबादी है। मैं उन अल्पसंख्यकों को एकजुट करना चाहता हूं और उन्हें बहुसंख्यक बनाना चाहता हूं। इसका अर्थ है संगठन का विराट कार्य - आबादियों को स्थानांतरित करना, नये-नये गांव बनाना। लेकिन हम तभी ऐसा कर सकते हैं जब हमें ऐसा करने दिया जाएगा।’ (पृष्ठ 40)

’हम भी उतने ही प्रबल राष्ट्रवादी हैं जितने कोई भी कांग्रेसी। लेकिन हम अंगेजों को तब तक भारत से जाने देना नहीं चाहते जब तक हमारे अधिकारों की रक्षा न हो जाए। यदि वे भारत छोड़कर चले जाएंगे तो हमारी नियति यूरोप के किन्हीं उत्पीडि़त लोगों की नियति से भी ज्यादा भयंकर होगी।

(वरडिक्ट ऑन इंडिया, पृष्ठ 41)क ख्1,

*. डॉ. अम्बेडकर ने एम.ए. और पी. एच. डी. की डिग्रियां कोलम्बिया विश्वविद्यालय से हासिल की

थीं न कि लंदन से, लेकिन उन्होंने अपनी डी. एस. सी. डिग्री लंदन विश्वविद्यालय से प्राप्त की

थी - संपादक।

  1. उद्धृत : खैरमोर, जिल्द 8, पृ. 36-39।