346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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’’अनुसूचित जातियां केवल राजनीतिक रक्षोपाय चाहती हैं। इस पर कोई विवाद नहीं हो सकता,’’ उन्होंने आगे बोलते हुए कहा, ’’अनुसूचति जातियों की प्रमुख मांग यह है कि उनके पृथक निर्वाचकमंडल हों, कारण यह है कि उनके बिना वे सब राजनीतिक रक्षोपाय जो, दिए जाएं, बेकार हो जाएंगे।’’
’’जहां तक मैं समझता हूं, मुस्लिम लीग को अनुसूचित जातियों के लिए पृथक निर्वाचकमंडल पर कोई आपत्ति नहीं है। आपत्ति केवल कांग्रेस को है जो हिन्दुओं का प्रतिनिधित्व करती है, और यदि कांग्रेस पृथक निर्वाचकमंडल पर राजी हो जाए तो कांग्रेस और अनुसूचित जातियों के बीच किसी असहयोग का कोई कारण नहीं होगा।’’
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काँग्रेस-लीग अपार कठिनाइयां
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा, ’’कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौते के सवाल का आधार भिन्न है। आज उनके बीच बहुत विशाल प्रायः अपार मतभेद हैं। लीग देश से अलग होना चाहती है और कांग्रेस उसका विरोध करती है। मैं यह नहीं कह सकता कि इस दूरी को कैसे कम किया जाए और मैं इस सवाल को कांग्रेस और मुस्लिम लीग पर छोड़ता हूं। वे स्वयं इसका फैसला करें हालांकि भारतीयों के रूप में अनुसूचित जातियां समझौते की शर्तों में ही रुचि नहीं रखतीं बल्कि वे इससे काफी चिंतित भी हैं।’’
ग्लोब का अगला सवाल था, एकता और समझदारी के हित में क्या आप अनुसूचित जातियों के लिए पृथक प्रतिनिधित्व का सुझाव दे सकते हैं ? क्या अनुसूचित जातियों के उन वर्गों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर आरक्षण देना संभव नहीं है जो कांग्रेस के प्रति राजनीतिक निष्ठा नहीं रखते ?’’ इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा, ’’मैं पहले ही कह चुका हूं कि यदि कांग्रेस राजी हो तो अनुसूचित जातियों को विधायिका, कार्यपालिका, सेनाओं में प्रतिनिधित्व पाने का अधिकार दे दिया जाए तो पूरी इमानदारी के साथ, उनके लिए पृथक निर्वाचकमंडल दिए जाएं क्योंकि पृथक निर्वाचकमंडलों से ही अनुसूचित जातियों के लिए इस संभावना की गारंटी मिलेगी कि वे अपने उन सदस्यों को विधायिका में निर्वाचित करा पाएंगे जो विधायिका में और कार्यपालिका में, कभी ऐसा कुछ होने पर, जिससे अछूतों के मंजूरशुदा अधिकार निरर्थक हो जाएं, लड़ाई लड़ने के लिए हमेशा तत्पर माने जा सकें।