350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विषय है। ईसाई विरासत में अपने पिता की संपत्ति एवं अपने पिता का धर्म ग्रहण करता है। वह कभी भी ईसाई धर्म की तुलना दूसरे धर्म से करना बंद करके उसके आध्यात्मिक मूल्य के बारे में अपना निजी निर्णय नहीं देता। ऐतिहासिक दृष्टि से, ईसाइयों का धर्मान्तरण हमेशा विशाल पैमाने पर हुआ है। और उन आधारों पर धर्मान्तरण, जिनका धर्मान्तरण करने वाले अछूतों के आध्यात्मिक मूल्य को समझने से कोई लेना-देना नहीं है, उनका धर्म परिवर्तन विभिन्न धर्मों और उनके आध्यात्मिक एवं सामाजिक मूल्यों की सूक्ष्म परीक्षा करके ही करवाया जाएगा। इसलिए कोई भी इस अंतःकरण पर संदेह न करे कि अछूतों का धर्मान्तरण वाणिज्यिक सौदे जैसी कोई चीज है। ऐसी बात नहीं है। यदि अछूतों को धर्मान्तरण करने से आध्यात्मिक और सामाजिक स्वरूप के फायदों के अलावा कोई फायदे मिलते हैं तो वे प्रासंगिक फायदे होंगे न कि आपराधिक दुष्प्रेरण।’’ ग्लोब’’ ख्1,
- जय भीम (साप्ताहिक), तारीख 25 दिसंबर, 1946 ।