37. अनुसूचित जातियों का मामला संयुक्त राष्ट्र संघ के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। - Page 368

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अनुसूचित जातियों का मामला संयुक्तराष्ट्र संघ के समक्ष प्रस्तुत हो

’’बम्बई, 17 जनवरी, 1947

अखिल भारतीय अनुसूचित जाति फेडरेशन की कार्य समिति ने आज एक संकल्प अंगीकार किया कि ‘‘भारत में हिन्दुओं के द्वारा अनुसूचित जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अत्याचारों के लिए उनके विरुद्ध मामला संयुक्त राष्ट्र सभा के समक्ष रखा जाए। समिति ने फेडरेशन के अध्यक्ष श्री एल. शिवराज की अध्यक्षता में आयोजित अपना दो दिवसीय अधिवेशन आज समाप्त किया।

समिति ने संयुक्त राष्ट््र संघ के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा तैयार किया गया ज्ञापन अनुमोदित किया तथा फेडरेशन के अध्यक्ष को निदेश दिया कि सं. रा. सं. के सचिव को औपचारिक रूप से मामला प्रस्तुत करने के लिए शीघ्र कदम उठाये जाएं तथा इस प्रयोजनार्थ फेडरेशन का एक शिष्टमंडल संगठित किया जाए।

अन्य शिकायतों के साथ-साथ, ज्ञापन में यह भी कहा गया था कि ’’हिन्दुओं के अत्याचारों तथा निरंतर और निर्लज्ज हिंसक कार्रवाई से अनुसूचित जातियों की स्थिति दक्षिणी अफ्रीका में भारतीयों की स्थिति से कहीं ज्यादा खराब है। ज्ञापन में यह भी शिकायत की गई कि ब्रिटिश सरकार अनुसूचित जातियों को संरक्षण और न्याय देने में नाकाम रही है तथा अनुरोध किया गया कि यू.एन.ओ. आवश्यक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए दखल दे।’’

भारत के भावी संविधान की रचना से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के बारे में कार्य समिति ने एक दूसरे संकल्प में घोषित किया कि फेडरेशन एक एकीकृत भारत और सुदृढ़ केंद्रीय सरकार’’ की समर्थक है। संकल्प के अनुसार, फेडरेशन सभी पार्टियों का सहयोग प्राप्त करने के लिए एवं भारत की सांविधानिक समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान पर पहुंचने के लिए समूहकरण संबंधी कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार होगी।’’