37. अनुसूचित जातियों का मामला संयुक्त राष्ट्र संघ के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। - Page 369

352 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

समता संविधान का आधार होनी चाहिए
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संकल्प में कहा गया था कि फेडरेशन भावी भारतीय संविधान के मूलभूत आधार के रूप में स्वतंत्रता और समता की समर्थक है। ’’अनुसूचित जातियों के हित की लड़ाई लड़ते हुए और उस हित पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना’’ फेडरेशन सभी अल्पसंख्यकों की न्यायसंगत और आवश्यक मांगों का समर्थन करती है चाहे वे किसी भी समुदाय के हों।’’

कार्य समिति ने यह भी राय व्यक्त की कि ’’यह भारत के हित में होगा कि वह डोमिनियन स्थिति से संतुष्ट रहे तथा उसे कुछ वर्षों के लिए मान ले जो भारत के स्वाधीनता के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले।’’

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अल्पसंख्यक समिति को ज्ञापन

कार्य समिति ने संविधान सभा के सदस्य डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा तैयार किए गए एक दूसरे ज्ञापन को भी अनुमोदित किया। इस ज्ञापन में भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों के लिए रक्षोपाय सुझाये गए हैं।

कार्य समिति ने संविधान सभा में फेडरेशन के प्रतिनिधियों को यह आग्रह करने का निदेश दिया कि, ’’सांविधानिक रक्षोपायों की अंतिम मंजूरी केंद्रीय सरकार पर डाल देनी चाहिए और इस बात पर जोर दिया कि, ’’विधानमंडलों में अनुसूचित जातियों का वास्तविक प्रतिनिधित्व पक्का (गारन्टीकृत) करने का एकमात्र तरीका पृथक निर्वाचक-मंडल हैं जिनके बिना दूसरे सभी रक्षोपाय निश्चय ही केवल कागज पर रह जाएंगे।’’

समिति ने बम्बई नगर निगम के सदस्य श्री बी. जे. देवरुक्खड़ तथा आंध्र के दो अन्य अनुसूचित जाति के कार्यकर्ताओं श्री हरी और डॉ. धर्मन्ना के निधन पर शोक प्रकट करने वाला संकल्प भी पारित किया।

डॉ. अम्बेडकर ने प्रेस को दिए एक साक्षात्कार में फेडरेशन की कार्य समिति द्वारा पारित संकल्प को स्पष्ट किया और इस पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र संघ को भारत की अनुसूचित जातियों के 8 करोड़ लोगों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले मुद्दे पर अधिकारिता प्राप्त है जैसे यू. एन. ओ. को दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के मामले पर अधिकारिता थी। उन्होंने कहा कि वह अमेरिका में नीग्रो नेता पॉल डुआबोइस के संपर्क में हैं। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार पॉल डुआबोइस ने संयुक्त राज्य अमेरिका में नीग्रो के मामले को यू.एन.ओ. के समक्ष प्रस्तुत किया था।