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डॉ. अम्बेडकर ने बताया कि पॉल डुआबोइस संयुक्त राज्य अमेरिका में नीग्रो संघ के संस्थापक अध्यक्ष थे। वह अमेरिका में नीग्रो के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के लिए लड़ रहे थे। *
डॉ. अम्बेडकर ने, भारत में अनुसूचित जातियों के कष्टों का हवाला देते हुए, अमेरिका में नीग्रो की हालत से तुलना की जिनके साथ, उनके अनुसार, श्वेत अमरीकियों द्वारा वैसे ही अत्याचार किए जा रहे हैं जैसे सवर्ण हिन्दुओं द्वारा अनुसूचित जातियों के साथ।’’
भारत के भावी संविधान की रचना की समस्या का विवेचन करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि उनके पास एक उत्तम तरीका है जिसके द्वारा एक पार्टी के बहुसंख्यक समुदाय की कार्यपालिका दूसरी पार्टी के अल्पसंख्यक समुदाय के हितों और भावनाओं की पूरी तरह अवहेलना करके नहीं बन पाएगी। उन्होंने अपनी स्कीम का विवरण प्रकट करने से इंकार कर दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि वर्तमान संविधान के अधीन एक पार्टी के प्रमुख समुदाय ने प्रांत में प्रशासन पर कब्जा कर लिया और इस प्रकार अल्पसंख्यक के साथ घोर अत्याचार किया। ’’उन्होंने कहा जब एक प्रमुख समुदाय का प्रांत की सरकार की कार्यपालिका पर एकाधिकार हो जाए तो अल्पसंख्यक समुदाय की असहाय स्थिति को भारत के भावी संविधान में कानूनी प्रावधान करके रोकना चाहिए।’’ उन्होंने आगे कहा कि वह विभिन्न प्रांतों में तथा केंद्र में भी बड़े और छोटे समुदायों के प्रतिनिधियों द्वारा निर्मित गठबंधन सरकार के समर्थक हैं।
डॉ. अम्बेडकर ने अपना मत दोहराया कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत को डोमिनियन स्थिति से संतुष्ट हो जाना चाहिए। उन्होंने घोषित किया कि भारत की स्वाधीनता के सवाल पर मेरा नजरिया पूरी तरह देश की रक्षा के दृष्टिकोण से जुड़ा है और मेरा पक्का विश्वास है कि ब्रिटेन की मदद के बिना भारत वर्तमान में अकेले अपनी रक्षा करने में समर्थ नहीं है। उन्होंने अंत में कहा कि यदि संविधान सभा मेरा तरीका अंगीकार कर लेती है तो भारत को भारत में तैनात ब्रिटिश सेना की मदद, ब्रिटिश नियंत्रण के बिना मिल सकती है।’’ ख्1,
* . इस वाक्य में कुछ शब्द अस्पष्ट हैं - संपादक।
- जय भीम, तारीख 26 जनवरी, 1947।