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भेजा है। यह ठीक है कि हमारे अपने ही लोगों ने सत्याग्रह के रूप में यू. पी. की सरकार को चुनौती देकर, सत्याग्रहियों की रिहाई को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। लेकिन यदि अल्पसंख्यक समिति में हमारे रक्षोपायों के बारे में कोई समझौता हो जाता है तो मुझे, निःसंदेह, उनकी तुरंत रिहाई का सौदा कर लेना चाहिए।
सादर,
आपका
ह./- बी. आर. अम्बेडकर
माननीय श्री जे. एन. मंडल,
विधि सदस्य, भारत सरकार,
नई दिल्ली’’ ख्1,
- खैरमोरे, जिल्द, 8 पृष्ठ 164-166।