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पाकिस्तान की अनुसूचित जातियों को भारत आ जाना चाहिए
नई दिल्ली 27 नवम्बर, 1947
विधि मंत्री डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने आज जारी वक्तव्य में, उन्हें भारत आने का निमंत्रण देते हुए कहा -
’’भारत में एकीकरण का विरोध करने के कारण निजाम सहानुभूति का पात्र नहीं है। मेरी चिंता यह है कि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति ऐसे आदमी का पक्ष लेकर जो भारत का दुश्मन है, बिरादरी को बदनाम न करे।
पाकिस्तान में अपने अनुयायियों की स्थिति के बारे में डॉ. अम्बेडकर ने उल्लेख किया कि मुस्लिम लीग और उसके अध्यक्ष ने अनुसूचित जातियों का तभी साथ दिया जब उनके लिए उपयोगी था। उनके साथ किए गए अत्याचारों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें भी पाकिस्तान से भारत आ जाना चाहिए।
डॉ. अम्बेडकर ने महसूस किया कि भारत में अनुसूचित जातियों की संख्या इतनी बड़ी है और सुसंगठित है कि वे वर्तमान सरकार को प्रभावित करने में नाकाम नहीं हो सकते।
उन्होंने आगे यह भी कहा, ’’मुझे पाकिस्तान और हैदराबाद से अनुसूचित जातियों की अनेकों शिकायतें मिली हैं। उन्होंने मुझसे कहा है कि मैं उन्हें उन कष्टों से छुटकारा दिलाने के लिए कुछ करूं जिन्हें वे पाकिस्तान और हैदराबाद द्वारा उनके संबंध में अपनाई गई नीति के फलस्वरूप भोग रहे हैं। पाकिस्तान में स्थिति यह है कि उन्हें भारत नहीं आने दिया जाता। हैदराबाद में भी, उन्हें मुस्लिम आबादी में इजाफा करने की दृष्टि से इस्लाम धर्म अंगीकार करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। हैदराबाद की अनुसूचित जातियों के दिलों में दहशत फैलाने की दृष्टि से इत्ते हाद उल-मुस्लिमीन द्वारा, अछूतों के घर जलाकर, एक नियमित अभियान चलाया जा रहा है ताकि वे हैदराबाद में उत्तरदायी सरकार के आंदोलन में कभी भाग न लें और हैदराबाद को भारतीय संघ में विलय के लिए बाध्य न करें।
खुला निमंत्रण
’’मैं तो उन्हें भारत आने का निमंत्रण ही दे सकता हूं। भारत में अनुसूचित जातियों की वही अवस्था है जो पाकिस्तान में है। भारत में, उन्हें देश भर में सवर्ण हिन्दुओं