41. पाकिस्तान की अनुसूचित जातियों को भारत आना चाहिए। - Page 377

360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के अत्याचारों का शिकार बनाया जाता है। जबकि पाकिस्तान में, उनका बलपूर्वक धर्मांतरण करवाया जाता है। हिन्दुस्तान में उन्हें राजनीतिक परिवर्तन के लिए बाध्य किया जाता है। उन्हें कांग्रेस के सदस्य बनने के लिए मजबूर किया जाता है और यदि वे उसके सदस्य बनने से मना करते हैं तो उनका बहिष्कार करके उनका जीना कठिन बनाया जाता है। विशेषकर यू.पी. में ऐसे मामले हुए हैं जहां अनुसूचित जातियों के साथ इतना अत्याचार और उत्पीड़न किया जाता है कि उन्हें जिन्दा जला दिया जाता है। पूर्वी पंजाब में अनुसूचित जातियों पर उन सिखों और जाटों द्वारा जो पश्चिम पंजाब से आए हैं अत्याचार और उत्पीड़न किया जा रहा है जो उतने ही असह्य हैं। पूरी तरह सवर्ण हिन्दुओं द्वारा नियंत्रित प्रशासन ने उन्हें तनिक भी सहायता देने के लिए कुछ नहीं किया है।

भारतवासी अनुसूचित जातियों की दुर्दशा के बावजूद मैं उन अनुसूचित जातियों से, जो आज पाकिस्तान में छिपे हुए हैं, यह कहना चाहूंगा कि वे भारत आ जाएं। कांग्रेस पार्टी ने नये संविधान में अनुसूचित जातियों के लिए आवश्यक राजनीतिक रक्षोपायों को इतना कमजोर बना दिया है कि वे व्यर्थ से भी बदतर हो गए हैं। फिर भी, हमारी संख्या इतनी अधिक है कि यदि हम सुसंगठित हो जाएं तो हम वर्तमान सरकार पर अपना प्रभाव अवश्य डाल सकते हैं।

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चाहे पाकिस्तान में हों या हैदराबाद में, अनुसूचित जातियों के लिए मुस्लिमों या मुस्लिम लीग में आस्था रखना घातक होगा। मुसलमानों को अपने दोस्त समझना अनुसूचित जातियों की केवल इसलिए आदत बन गई है क्योंकि वे हिन्दुओं को नापसंद करते हैं। यह गलत धारणा है। मुसलमान अनुसूचित जातियों का समर्थन चाहते थे लेकिन उन्होंने अनुसूचित जातियों को अपना समर्थन कभी नहीं दिया। श्री जिन्ना हमेशा दोहरी चाल चलते हैं। वे तभी इस पर बहुत जोर देते थे कि अनुसूचित जातियां एक पृथक पार्टी हैं जब उन्हें ऐसा उपयोगी लगता था, लेकिन जब उन्हें उपयोगी नहीं लगता तो वे बराबर जोर देकर कहते हैं कि वे हिन्दू हैं। मुस्लिम और मुस्लिम लीग जो मुसलमानों को यथासंभव शीघ्र शासी वर्ग बनाने के आवेश में हैं, अनुसूचित जातियों के दावे पर ध्यान नहीं देंगे। यह मैं अनुभव से कह रहा हूं।

जहां तक धर्मान्तरण का मुद्दा है, हम अनुसूचित जातियों को इसे हिंसा द्वारा बाध्य अंतिम अवलम्ब मानना चाहिए और जो लोग बल तथा हिंसा द्वारा अपना धर्म बदलें उनके लिए मेरा कहना है कि वे स्वयं को उस समूह में हमेशा के लिए