41. पाकिस्तान की अनुसूचित जातियों को भारत आना चाहिए। - Page 378

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विलुप्त न मानें। मेरा वायदा है कि यदि वे वापस आना चाहेंगे तो मैं इस बात का ध्यान रखूंगा कि उनका वापस समूह में स्वागत हो और उन्हें उसी प्रकार बंधु माना जाए जिस प्रकार वे धर्मान्तरण से पूर्व माने जाते थे।

’’हैदराबाद की अनुसूचित जातियों को किसी भी हालत में निजाम और इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन के पक्ष में नहीं जाना चाहिए। हिन्दू लोग हमारे ऊपर कितने भी अत्याचार और उत्पीड़न करें हमें इससे गुमराह होकर और अपने कर्तव्य से विमुख करने के कारण निजाम सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। वह ऐसा करके स्वयं अपने हित के प्रतिकूल काम कर रहे हैं। वह यह नहीं समझते कि उनके वंशानुगत अधिकार तभी ज्यादा सुरक्षित रहेंगे जब वे संघीय संविधान द्वारा गारंटीकृत होंगे। इस पर भारत के 90 प्रतिशत हिन्दुओं की स्वीकृति होगी, लेकिन तब नहीं जब वे इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन पर आश्रित होंगे। मुझे इस बात की चिंता है कि अनुसूचित जातियों का कोई भी सदस्य उसके पक्ष में जाकर जो भारत का दुश्मन है, बिरादरी को बदनाम न करे।’’ - ए.पी.आई.’’ ख्1,

  1. द नेशनल स्टेंडर्ड, तारीख 28 नवम्बर, 1947।