42. अनुसूचित जाति के शरणार्थियों की अवहेलना की गई। - Page 379

362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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अनुसूचित जातियों के शरणार्थियों की उपेक्षा
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विभाजन के बाद, बंगाल में तथा पंजाब में, हिन्दू- मुसलमानों में इतने भयंकर साम्प्रदायिक झगड़े हुए जो पहले कभी नहीं देखे गए। दोनों समुदायों को भीषण नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन उस मनमुटाव के दुष्परिणाम उन क्षेत्रों में रहने वाले असंख्य अछूतों को झेलने पड़े। डॉ. ्रबी. आर. अम्बेडकर को अनेक पत्र मिले जिनमें हिन्दुओं, मुसलमानों, सिखों और जाटों के हाथों अछूतों द्वारा भोगे गए कष्टों का उल्लेख किया गया था। इसलिए डॉ. अम्बेडकर ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को एक पत्र (तारीख 18 दिसंबर, 1947) लिखा और उन्हें अछूतों के दुखों की जानकारी दी तथा अनुसूचित जाति के शरणार्थियों को राहत प्रदान करने का अनुरोध किया - संपादक

’’नई दिल्ली,

18 दिसंबर, 1947

प्रिय श्री जवाहर लाल,

मुझे अनुसूचित जातियों के उन निष्क्रांतों से जो पाकिस्तान से भारत आ गए हैं जिनका पाकिस्तान सरकार पता लगा रही है और उनसे अनेक शिकायतें मिल रही हैं। तथा जिन्हें भारत नहीं आने दिया गया है। और मैं यह महसूस करता हूं कि समय आ गया है कि मैं आपका ध्यान उनके कष्टों की ओर आकृष्ट करूं। क्या हो रहा है और क्या किया जाना अपेक्षित है इस पर जानकारी देने के लिए मैं नीचे उनके दुःखों के कारणों और उन उपायों का उल्लेख कर रहा हूं जो उनके कष्ट दूर करने के लिए किए जाने चाहिएः-

(1) पाकिस्तान सरकार अनुसूचित जातियों को अपने राज्यक्षेत्र से बाहर निकलने

से हर संभव तरीके से रोक रही है। मुझे इसका कारण यह प्रतीत होता

है कि वे चाहते हैं कि अनुसूचित जातियां पाकिस्तान में रहकर निम्न

काम करें और पाकिस्तान के भूमि धारक लोगों के लिए भूमिहीन मजदूरों

के रूप में काम करें। पाकिस्तान सरकार खास तौर पर झाडूकश लोगों

(भंगियों) को निरुद्ध करने के लिए चिंतित हैं जिन्हें उसने ’अनिवार्य सेवा

के व्यक्ति’ घोषित कर दिया है और जिन्हें वे एक माह की सूचना दिए

बिना छोड़ने को तैयार नहीं हैं।