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(2) एम. ई. ओ. नामक संगठन ने उन अनुसूचित जाति के शरणार्थियों की, जो
पाकिस्तान से निकलने के उत्सुक हैं, मदद करने में कुछ उपयोगी भूमिका
निभायी है। किन्तु मैं समझता हूं कि पाकिस्तान सरकार एम. ई. ओ. को
उन अनुसूचित जातियों से सीधे संपर्क करने की इजाजत नहीं दे रही है
जो वहां से निकलना चाहते हैं। परिणामस्वरूप, अनुसूचित जातियों को
निकालने की प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है और कुछ जगहों पर तो यह
प्रक्रिया बंद पड़ी है। मुझे यह भी बताया गया है कि एम. ई. ओ. अति
शीघ्र बंद होने वाला है। यदि ऐसा होता है तो पाकिस्तान से अनुसूचित
जातियों का निकल पाना नितांत असंभव होगा।
(3) अतः निम्नलिखित कदम उठाये जाने आवश्यक हैं :-
( i ) पाकिस्तान सरकार से कहा जाए कि वह अनुसूचित जातियों के
निकलने के रास्ते में अड़चनें पैदा न करे।
( ii ) एम. ई. ओ. को अनुसूचित जातियों से सीधे सम्पर्क करने और उन्हें
निकालने की इजाजत दी जाए।
( iii ) एम. ई. ओ. को तब तक कायम रखा जाए जब तक सारी अनुसूचित
जातियां पाकिस्तान से न निकल जाएं।
(4) अभी तक राहत और पुनर्वास मंत्रालय ने पश्चिमी पंजाब के लिए अनुसूचित
जातियों में से केवल एक अधिकारी नियुक्त किया है। लेकिन पाकिस्तान
के दूसरे प्रांतों, जैसे उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत सिंध और भावलपुर को छोड़
दिया गया है तथा उनके लिए कोई अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है।
मंत्रालय को निदेश दिया जाए कि वह इन क्षेत्रों के लिए तुरंत नियुक्तियां
करे ताकि विशेष अधिकारी पाकिस्तान क्षेत्र का भ्रमण करके उन स्थानों
का पता लगाए जहां अनुसूचित जातियों के लोगों को पाकिस्तान सरकार
द्वारा निकलने नहीं दिया जा रहा है।
II
जहां तक उन अनुसूचित जातियों का संबंध है, जो पाकिस्तान से पूर्वी पंजाब आए हैं, उन्होंने भी शिकायतें भेजी हैं। ये शिकायतें संख्या में उनसे कहीं ज्यादा हैं जो पाकिस्तान में रोक रखे गए लोगों से मिल रही हैं। उनका सारांश नीचे दिया जा रहा है :-