364 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
( i )
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(1) जो अनुसूचित जातियों के निष्क्रांत पूर्वी पंजाब आ गए हैं और वे भारत
सरकार द्वारा स्थापित शरणार्थी कैंपों में नहीं रह रहे हैं। कारण यह है
कि इन शरणार्थी शिविरों के प्रभारी अधिकारी सवर्ण हिन्दू शरणार्थियों और
अनुसूचित जाति शरणार्थियों में भेदभाव करते हैं।
(2) ऐसा लगता है कि राहत और पुनर्वास विभाग ने यह नियम बनाया है कि
जो शरणार्थी राहत कैम्पों में रहते हैं उन्हीं को राशन, कपड़ा आदि मिल
सकता है। ऊपर बताए गए कारणों से राहत कैम्पों में न रहने के कारण
अनुसूचित जातियों के शरणार्थी कोई राहत नहीं पा रहे हैं। यह बहुत बड़ी
मुश्किल है।
(3) चूंकि भेदभाव नहीं रोका जा सकता इसलिए नियम में फेरबदल करना
आवश्यक है ताकि शिविरों से बाहर रहने वाले अनुसूचित जाति शरणार्थी
भी उसी प्रकार और उतनी राहत के हकदार हो जाएं जितनी शिविरों में
रहने वाले शरणार्थियों को मिलती है।
( ii )
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(1) पूर्वी पंजाब की सरकार द्वारा किए गए भूमि आबंटन में अनुसूचित जाति
के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। चूंकि पूर्वी पंजाब का प्रशासन
पूरी तरह सवर्ण हिन्दुओं के हाथों में है इसलिए या तो अनुसूचित जाति
निष्क्रान्तों के पुनर्वास में निजी रुचि रखने के लिए कोई नहीं है अथवा पूर्वी
पंजाब सरकार की जानकारी में यह लाने के विशेष कार्यभार के साथ कि
अनुसूचित जातियों के हितों की अनदेखी की जा रही है, भारत सरकार
द्वारा नियुक्त कोई एजेन्सी नहीं है।
(2) अतः यह आवश्यक है कि भारत सरकार पूर्वी पंजाब में काम करने के
लिए कई अधिकारियों को नियुक्त करे जिन्हें यह देखने का विशेष कार्य
दिया जाए कि भूमि का आबंटन निष्पक्ष रूप से किया जाए तथा अनुसूचित
जाति शरणार्थियों को उनका उचित हिस्सा मिले।
(3) मैंने माननीय श्री नियोगी को उन व्यक्तियों की सूची दे दी है जो इस काम
के लिए नियुक्त किए जा सकते हैं और जो मेरी जानकारी के अनुसार,
इस काम को करने के लिए सर्वाधिक योग्य हैं।