366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(ख) इसलिए यह आवश्यक है कि पूर्वी पंजाब सरकार से कहा जाए कि
वह अपनी भू-राजस्व व्यवस्था में परिवर्तन करके इस भेदभाव को
मिटाये और इसे रैयतवाड़ी व्यवस्था के समान बनाया जाए जिसके
अंतर्गत सारे गांववासियों को जमीन के मालिक बनने के संबंध में
बराबरी का हक दिया जाता है।
(6) (क) पूर्वी पंजाब प्रांत में, लैण्ड एलियेनेशन ऐक्ट अर्थात् भूमि अन्य संक्रामण
अधिनियम लागू है जिसका उद्देश्य कृषकों को सूदखोरों से बचाना
है। लेकिन इसमें तनिक भी संदेह नहीं हो सकता कि यह अत्यंत
दोषपूर्ण कानून है क्योंकि इसमें कृषक की ऐसी परिभाषा दी गई
है जो साम्प्रदायिक है और अधिभोगपरक नहीं है। इस कानून के
अनुसार, यदि कोई व्यक्ति उस समुदाय का है जो सरकार द्वारा
कृषक समुदाय घोषित किया गया हो तो वह कृषक है। पूर्ववर्ती
पंजाब सरकार ने अनुसूचित जातियों को कृषक समुदाय घोषित
न करने का विशेष ध्यान रखा था हालांकि अनुसूचित जाति का
हर सदस्य या तो किसान है या खेतीहर मजदूर है। परिणाम यह
हुआ कि पूर्वी पंजाब में अनुसूचित जातियां भू-संपत्ति खरीदने या
अर्जित करने से विवर्जित हैं तथा अपनी आजीविका के लिए हिन्दू,
सिख और जाट भू-स्वामियों पर आश्रित रहकर भूमिहीन मजदूर
की जिन्दगी जीने के लिए मजबूर हैं। यह कानून एक नृशंस कानून
है और मेरे विचार में इसे स्टेट्यूट बुक में नहीं रहने दिया जाना
चाहिए।
(ख) पूर्वी पंजाब सरकार को ’कृषक’ शब्द की परिभाषा को संशोधित
करके उसे अधिभोगपरक बना देना चाहिए ताकि जो भी व्यक्ति,
चाहे उसकी जाति और धर्म कुछ भी हो, खेती से अपनी आजीविका
कमाता है वह कृषक बन जाए और भू-संपत्ति खरीदने तथा अर्जित
करने के लिए हकदार हो जाए।
मैंने अनुसूचित जातियों की उन सब कठिनाइयों का उल्लेख कर दिया है जो मेरी जानकारी में लाई गई हैं। साथ ही उन उपचारों का भी उल्लेख कर दिया है जिनके अपनाए जाने से, मेरी राय में, उन कठिनाइयों का निराकरण हो जाएगा। कुछ उपचार भारत सरकार के हाथ में हैं और शेष पूर्वी पंजाब सरकार के हाथ में हैं। यदि भारत सरकार के पास इच्छा-शक्ति है तो कोई सवाल पैदा नहीं हो सकता कि ये उपचार उसके द्वारा लागू न किए जा सकें। उन उपचारों के संबंध