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में भी जो पूर्वी पंजाब सरकार के अधिकार में हैं, भारत सरकार को असहाय महसूस नहीं करना चाहिए। जब पुनर्वास का खर्च भारत सरकार अदा कर रही है तो उसे पूर्वी पंजाब सरकार को ऐसे उपाय विशेष अपनाने के लिए विवश करने का नैतिक अधिकार है जिन्हें भारत सरकार सभी वर्गों के लोगों के साथ निष्पक्ष और समान व्यवहार के लिए आवश्यक समझे। यही वजह है कि मैंने उन उपचारों को, जो पूर्वी पंजाब सरकार के हाथ में हैं, भारत सरकार की कार्रवाई के लिए सम्मिलित करने में संकोच नहीं किया है। मुसलमानों की समस्या पर अब तक भारत सरकार ने पूरा ध्यान दिया है। अनुसूचित जातियों की समस्या के बारे में यह मान लिया गया कि वह या तो विद्यमान ही नहीं है अथवा इतनी छोटी है कि उस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत नहीं है। हालांकि कुछ लोग अनुसूचित जातियों की समस्या को बताना पसंद नहीं करते फिर भी हममें से जो अनुसूचित जातियों के बारे में चिंतित हैं, यह जानते हैं कि समस्या है और वह मुसलमानों की समस्या से ज्यादा भीषण है।
मैंने बहुत बार सोचा है कि मैं पाकिस्तान और भारत में अनुसूचित जातियों के शरणार्थियों की समस्या की भारत सरकार की उपेक्षा पर जनता का ध्यान दिलाऊं। लेकिन कुछ कारणों से मैंने ऐसा नहीं किया। अन्य मामलों में आपके व्यस्त रहने के कारण मैंने इस सवाल पर आपकी चुप्पी के बारे में कोई शिकायत नहीं की है। लेकिन खेद है कि अब समय आ गया है कि आप इस समस्या पर निजी तौर पर ध्यान दें ताकि आप राहत और पुनर्वास मंत्री तथा बिना विभाग के मंत्री को निदेश जारी कर सकें कि वे अनुसूचित जातियों को, या तो उन उपचारों को अपनाकर जो मैंने इस पत्र में सुझाए हैं या मेरे द्वारा वर्णित प्रयोजनों को पूरा करने के लिए बेहतर उपचार खोजकर, उनके दुखों से छुटकारा दिलाएं। यदि आप इस मसले पर तुरंत ध्यान देंगे तो मैं आभारी होऊंगा।
आपका
ह./- बी. आर. अम्बेडकर
माननीय पंडित जवाहर लाल नेहरू
प्रधानमंत्री, भारत
नई दिल्ली।’’ ख्1,
पं. जवाहर लाल नेहरू ने उपरोक्त पत्र का उत्तर इस प्रकार दिया -
’’प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री
- पुनर्मुद्रित खैरमारे, जिल्द 10, पृ. 26-32।