43. सरकार को निष्पक्ष होना चाहिए। - Page 386

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पूर्वी पंजाब से आने वाले अछूतों की दयनीय दुर्दशा दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। इस समस्या का हल ढूंढने के लिए अस्पृश्य पदाधिकारियों को राहत और पुनर्वास विभाग में नियुक्त किया जाना है। इसलिए डॉ. अम्बेडकर ने माननीय श्री के.सी. नियोगी, राहत और पुनर्वास मंत्री, नई दिल्ली को पत्र लिखा।

वैयक्तिक नई दिल्ली

23 मार्च, 1948

प्रिय नियोगी,

आपको याद होगा कि आप चाहते थे कि मैं कुछ विशेष कार्यकर्ताओं के नामों की सिफारिश करूं, जिन्हें अनुसूचित जातियों के शरणार्थियों की, जो पश्चिमी पंजाब से पूर्वी पंजाब आए हैं, पुनर्वास के विषय में मदद के लिए आपके विभाग में नियुक्त किया जा सके। मैंने आपको उन व्यक्तियों की सूची दी थी जो इस काम के लिए नियुक्त किए जा सकते हैं। लेकिन दो व्यक्ति ऐसे हैं जिनकी मैंने सिफारिश की थी और जिनको आपने नियुक्त किया है तथा जिनके बारे में मैं आपको इस विषय में लिखना चाहता हूं। वे हैं - श्री बी. के. गायकवाड और श्री आर. एस. जाधव। इन दोनों ने मुझसे शिकायत की है कि इन्हें कोई भी काम नहीं दिया गया है और वे बेकार समय गवां रहे हैं। उन्होंने मुझे यह भी बताया है कि आपके विभाग में हरिजन अनुभाग के निदेशक श्री सेवक राम करमचन्द ने उन्हें बुलाकर उनसे इस देश की आम राजनीति पर उनके विचारों के बारे में पूछताछ की। जैसाकि उन्होंने मुझे बताया है, इस घटना से उन पर जो छाप पड़ी है वह यह है कि भारत सरकार कुछ लोगों को इसलिए नियोजित करना नहीं चाहती क्योंकि वे कांग्रेस पार्टी के नहीं हैं। सरकार का इस बात के लिए आग्रह करना कि उसके कर्मचारी वही राजनीतिक राय रखते हों जो सत्तारूढ़ दल की है, मुझे अनिष्टकर नहीं तो, बेहूदा अवश्य लगता है। मुझे विश्वास है कि श्री सेवक राम करमचन्द द्वारा व्यक्त दृष्टिकोण से आप सहमत नहीं हैं। मुझे चिन्ता इस बात की है कि ये जो दो आदमी रखे गए हैं उन्हें वह काम दिया जाए जिसके लिए इनकी भर्ती की गई है। साक्षात्कार के दौरान श्री करमचन्द ने इन्हें बताया कि हरिजन लीग द्वारा सिफारिशी व्यक्ति सर्वथा अयोग्य हैं और जो काम उनसे लिया जाना चाहिए उस प्रकार के काम के लिए वे बेकार हैं तथा यह कि अनुसूचित जाति फेडरेशन के व्यक्ति सर्वाधिक सक्षम हैं, फिर भी इन