372 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बी. आर. अम्बेडकर : बेवकूफी !
मुल्कराज आनन्द : यदि आप ग्रीक शब्द ईडियट के अर्थ से देखें तो
वह शब्द चक्र में घूमता रहता है।
बी. आर. अम्बेडकर : हमें सभी पुरानी आदतों, विचारों, परिपाटियों पर
सवाल उठाने होंगे। शिक्षा से प्रोत्साहित होकर
नौजवानों को शिक्षक से हर रोज एक नया सवाल
पूछना चाहिए।
मुल्कराज आनन्द : शिक्षकों को सिखाने का सबसे बढि़या तरीका !
वे प्रायः यह नहीं जानते कि पाठ्य पुस्तक के
अलावा क्या कुछ है। वस्तुस्थिति यह है कि प्रौढ़
युवक बनने पर भी कोई सवाल पूछकर ही बड़ा
हो सकता है। मैंने यह सीख हेनरी बर्जसन की
पुस्तक - ’क्रियेटिव इवोल्यूशन’ से ली है। हेगल,
कांट और डेस्कार्टस को पढ़ने के बाद विभिन्न
दार्शनिक समस्याओं से संबद्ध कठिनाइयों का
सामना करना पड़ा। बर्जसन ने कहा था - आदमी
प्रत्येक दार्शनिक सिद्धांत पर सवाल उठाकर चैतन्य
को ऊंचा उठा सकता है।
बी. आर. अम्बेडकर : बुद्ध ने ब्राह्मणों से उनके हर विश्वास के बारे में
बहस की। उन्होंने सभी लोगों को जाति बहिष्कृत
करके निम्नीकृत बना दिया। उनका कहना था,
ईश्वर ने आपको इन वर्णों में पैदा किया है -
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। बुद्ध ने पूछा - स्वयं
मनुष्य- व्यक्ति के बारे में क्या ? चूंकि आदमी
एक ऐसे कुटुम्ब में पैदा होता है जो मृत जानवरों
के शवों को संभालता है, उसे तिरस्कृत कर अछूत
कहा जाता है। सभी वनवासी लोग हिन्दुओं के
लिए जंगली ................ हैं।
मुल्कराज आनन्द : बहिष्कृत !
बी. आर. अम्बेडकर : वस्तुतः, हाथ से काम करने वाला हरेक आदमी
बहिष्कृत था और है। जो जानवरों की खाल