44. अपना प्रकाश स्वयं बनें। - Page 390

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उतारते हैं, जो गोबर ढोते हैं, जो जमीन पर कमीन का काम करते हैं ! उन सब पर ठप्पा लगा दिया गया और हमेशा के लिए बंधुआ मजदूर बना दिया गया। पांच हजार साल बाद स्थिति और भी

खराब है। अछूत आदमी नहाने के बाद भी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता। वह गांव के कूएं से पानी नहीं खींच सकता - उसे तो गांव के बाहर गंदे तालाब से पानी लेना चाहिए। वह जमींदार की जमीन में अपने जानवर नहीं चरा सकता। वह गंदा है क्योंकि गंदगी को साफ करता है। उसे हमेशा अशुद्ध माना जाता है। जानवर को छू सकते हैं अछूत (अस्पृश्य) को नहीं.....................

मुल्कराज आनन्द : क्या संविधान सभा के सदस्य के नाते, आप व्यक्ति (व्यष्टि) के अधिकारों पर जोर देकर बोल पाए हैं? मैं देखता हूं कि आपकी समिति मूल अधिकार- व्यक्ति को स्वतंत्र्य अधिकार देती है। लेकिन हम देखते हैं कि आपने भी संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार मान लिया है ........... क्या सम्पत्ति का अधिकार उन लोगों को निर्णायक फायदा नहीं पहुंचाता जिन्हें सम्पदा विरासत में मिली है? इस प्रकार गरीबों में सबसे गरीब लोग अर्थात् अछूत लोग हमेशा नुकसान में रहेंगे।

बी. आर. अम्बेडकर : हमने अपने संविधान में, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी लोकतंत्र का आदर्श प्रस्तुत किया है................ यदि हरेक व्यक्ति को राज्य के अभिधृति अधिकारों से जमीन जोतने का अधिकार मिल सकता है तो विशेषाधिकार की समता सुनिश्चित की जा सकती है और शोषण की कोई जरूरत नहीं होगी। अभी तक अछूतों को और अनेक सवर्ण हिन्दुओं तथा मुसलमानों को भी जमीन धारण (अभिधृति) का अधिकार प्राप्त नहीं हैं। ये सब भूमिहीन किसान, केवल मजदूर हैं।