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374 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुल्क राज आनन्द : तब तो काम करने का अधिकार मूल अधिकार

होना चाहिए।

बी. आर. अम्बेडकर : मैं तो प्रारूपण समिति के सदस्यों में से केवल

एक सदस्य मात्र था।

मुल्कराज आनन्द : इसलिए आप शेरों के सामने मेमना बन गए!

बी. आर. अम्बेडकर : मैं बहुत मिमियाया, अब मैं दहाड़ रहा हूं।

मुल्क राज आनन्द : वकील होने के नाते; आप जानते हैं न्यायाधीश

हमेशा ऊंची जाति के; उच्च वर्ग के हिन्दुओं के

पक्ष में फैसला देंगे।

बी. आर. अम्बेडकर : निःसंदेह, पं. जवाहर लाल नेहरू की सरकार में

एकमात्र गैर-ब्राह्मण ने संपत्ति के स्वामित्व के

अधिकार को मूल अधिकार बनाये जाने के खिलाफ

कड़ा संघर्ष किया.................. लेकिन बाबू राजेन्द्र

प्रसाद ने महसूस किया कि नेहरू भारत को रूस

बनाना चाहते हैं। इसलिए सवर्ण हिन्दुओं ने व्यक्ति

के अन्य अधिकारों को निदेशक सिद्धांत के रूप

में ही माना ............. जिनके लिए संसद में संघर्ष

किया जाएगा।

मुल्क राज आनन्द : जो सम्पत्ति मालिकों के पक्ष में होंगे।

बी. आर. अम्बेडकर : एक दिन समाजवादी लोग बहुमत प्राप्त कर सकते

हैं और प्रतितोषण की मांग कर सकते हैं। जो भी

हो, जाति बहिष्कृत और जनजातियां अनुसूचित

जातियां घोषित की गई हैं। उनके उत्थान के लिए

उन्हें कुछ विशेषाधिकार दिए जाएंगे जैसे स्कूलों,

और कालेजों में दाखिले के लिए आरक्षण तथा

छात्रवृत्तियां।

मुल्कराज आनन्द : सवर्ण हिन्दू हमेशा आरक्षण पर नाराज होंगे।

बी. आर. अम्बेडकर : हमें अपने आपको सगठित करना होगा। जिन्हें

विरासत नहीं मिली है उन्हें संघर्ष के लिए जागृत