44. अपना प्रकाश स्वयं बनें। - Page 392

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करना होगा। मुसलमानों को भी सवर्ण अछूत

मानते हैं। इसलिए यदि उन्हें भी शामिल कर

लिया जाए तो जाति बहिष्कृत लोग सवर्ण हिन्दुओं

से ज्यादा हैं। और जनजातियों के लोग। ये सब

समाजवादियों के साथ मिलकर निजी संपत्ति का

स्वामित्व समाप्त कर सकते हैं। न कोई जमींदार,

न किसान ! और न ही कोई भूमिहीन मजदूर।

मुल्कराज आनन्द : राजकीय पूंजीवाद भी खतरनाक सिद्ध हो सकता

है, आप जानते हैं, स्टालिन ने रूस में क्या किया,

उसने साम्यवाद के नाम पर लोगों पर कुछ

नौकर-शाह थोप दिए।

बी. आर. अम्बेडकर : इसमें कोई शक नहीं, हमें व्यक्ति को दूसरे व्यक्तियों

द्वारा उसके अधिकारों पर किए जाने वाले आक्रमण

से बचाना होगा। व्यक्ति की स्वतंत्रता हमेशा प्रमुख

सरोकार होनी चाहिए। जब मैंने मूल अधिकारों पर

जोर दिया था तो यही बात मेरे दिमाग में थी।

मुल्क राज आनन्द : यदि यह बात आपके दिमाग में थी तो आप संसद

से मूल अधिकारों को पुनरीक्षित कराने का आग्रह

कर सकते हैं। हमें राजकीय पूंजीवाद और निजी

पूंजीवाद दोनों के खिलाफ लड़ना होगा। आप

जानते हो कि किस प्रकार असंख्य लोग सभी

जगह मालिक की इच्छा के अधीन रहते हैं।

बी. आर. अम्बेडकर : वस्तुतः, अभी तक स्वतंत्रता मालगुजारी बढ़ाने की

जमींदार की स्वतंत्रता प्रतीत होती है। पूंजीपति

हमेशा मजदूरी घटाना और काम के घंटे बढ़ाना

चाहता है। पूंजीवाद निजी नियोजक की तानाशाही

है।

मुल्कराज आनन्द : मूल अधिकार - प्राण, स्वतंत्रता और खुशी का

अधिकार - सपना बनकर रह गए हैं ............।

बी.आर. अम्बेडकर : नौजवानों को संघर्ष जारी रखना होगा। वे संविधान

को बदल सकते हैं।