44. अपना प्रकाश स्वयं बनें। - Page 393

376 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुल्कराज आनन्द : हो सकता है, यह फ्रांस में 1789 की क्रांति जैसे

उलट-फेर बिना संभव न हो।

बी.आर. अम्बेडकर : आपसे यह सुनकर अजीब लगा। मैंने सोचा था

कि आपने अपने उपन्यास में गांधी को अछूतों का

मसीहा बनाकर, अहिंसा का रास्ता अपना लिया

है।

मुल्कराज आनन्द : मैं महात्मा के आदर्शों पर नहीं चल सका। हमें

हिटलर और मुसोलोनी का मुकाबला करना पड़ा।

हम स्पेन गए और वहां हमने अंतरराष्ट्रीय ब्रिगेड

में भाग लिया। हालांकि मैं एक क्लिनिक में खून

देखकर बेहोश हो गया था और मुझसे क्लिनिक

छोड़ने को कहा गया था.............. लेकिन दूसरे

विश्वयुद्ध में किसी न किसी का तो पक्ष लेना ही

था। एक कवि ने फासिस्टवाद के विरुद्ध लोकतंत्र

की स्वतंत्रता के तथाकथित युद्ध को ’’महाझूठ’’

के विरुद्ध ’’आधे झूठ’’ की लड़ाई कहकर पुकारा

था।

बी. आर. अम्बेडकर : आप जानते हैं, हालांकि महात्मा पूरी तरह हरिजनों

के लिए थे फिर भी उन्होंने भगवत गीता द्वारा

आदिष्ट वर्णाश्रम में अपनी आस्था नहीं छोड़ी......

उन्हें परमेश्वर, हरि की संतान कहकर उन्होंने

सोचा था कि वह उनका उत्कर्ष कर रहे हैं।

वस्तुतः वे निम्नतम स्तर पर छोड़ दिए गए।

मुल्क राज आनन्द : यही वजह है कि आपने बौद्ध धर्म अपना लिया

है?

बी. आर. अम्बेडकर : हो सकता है, वही मुख्य कारण रहा हो। साथ ही,

अनुसूचित जाति का नागरिक बने रहकर हम जाति

बहिष्कृत की स्थिति स्वीकार कर लेते हैं। मैंने मह­

सूस किया कि बुद्ध में आस्था मनुष्यों-स्त्री-पुरूषों

के आडम्बरों से मुक्ति प्रदान करती है। वह हिन्दू

भगवान ब्रह्मा में विश्वास नहीं रखती। गूढ़ मिथक