378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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हिन्दुत्व भारत में सामाजिक चिंतन की नवीनतम देन है
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’’बम्बई, बुधवार *
भारत सरकार के विधि मंत्री डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म ग्रहण करने संबंधी
खबरों पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। वे आज शाम दिल्ली से यहां पहुंचे।
डॉ. अम्बेडकर ने पत्रकारों को बताया कि वे सिद्धार्थ कालेज की तर्ज पर अहमदनगर में एक कालेज खोलना चाहते हैं। वह कालेज आगामी जुलाई से पहले शुरू हो जाएगा। उसमें कला और विज्ञान दोनों विषयों की शिक्षा दी जाएगी।
आज रात वे पूना के लिए रवाना होंगे और कल शाम शहर लौटेंगे।
उन्होंने कहा, लोगों की इस विषय में रुचि है, इसलिए वे भारत में बौद्ध धर्म के उद्भव और पतन के कारणों से संबंधित जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं।
डॉ. अम्बेडकर की राय थी कि जब तक बौद्ध धर्म के उद्भव की वास्तविक परिस्थितियों को नहीं समझा जाएगा, तब तक बौद्ध धर्म की महत्ता समझ में नहीं आएगी। वह उन ज्यादातर लोगों से असहमत थे जिनकी धारणा है कि भारत का धर्म हमेशा हिन्दू धर्म रहा है। उन्होंने घोषित किया कि ’’हिन्दू धर्म भारत में सामाजिक चिंतन की नवीनतम देन है।’’
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पतन के कारण
बौद्ध धर्म के पतन के कारणों पर चर्चा करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने भारत में अनेक लोगों के इस सुझाव का खंडन किया कि बौद्ध धर्म शंकराचार्य के तर्कशास्त्र द्वारा नष्ट कर दिया गया। ’’यह तथ्यों के विपरीत है, क्योंकि बौद्ध धर्म उनके निधन के बाद अनेक शताब्दियों तक अस्तित्व में रहा।’’
डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि भारत में बौद्धधर्म का ह्रास वैष्णवत्व
और शैवत्व के अभ्युदय के फलस्वरूप हुआ। दूसरा कारण था भारत पर
* . 3 मई, 1950।