46. अनुसूचित जाति का उद्धार घोषणा-पत्र का प्रारूप - Page 401

384 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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  1. अनुसूचित जाति संघ शिक्षा एवं सेवाओं के मामले में पिछड़ी जातियों, अस्पृश्नीय और जनजातियों के उन्नयन के लिए संघर्ष करेगा। इसे संघ की योजित कार्यवाही में परम प्राथमिकता प्राप्त होगी और इसे आधारभूत तत्व माना जायेगा। कार्यक्रम के इस भाग को कार्यान्वित करने के क्रम में किसी प्रकार के विलम्ब या साधनहीनता को अवरोध बनने नहीं दिया जायेगा। अनुसूचित जाति संघ के विचार में, इन जातियों को दी जाने वाली शिक्षा की प्रकृति न तो प्राथमिक शिक्षा है और न ही उच्चतर माध्यमिक शिक्षा है। इसका अभिप्राय ऐसी उच्च स्तरीय देशी तथा विदेशी उच्च शिक्षा से है जो इन जातियों को देश के सिविल प्रशासित एवं सैन्य सेवाओं योग्य बनने के लिए समर्थ बनायेगा। इसी प्रकार सेवाओं के मामले में, अनुसूचित जाति संघ न्यूनतम अर्हता की शर्त पर, आरक्षण के लिये तब तक दबाव डालेगा, जब तक ये जातियाँ देश की सिविल एवं सैन्य सेवाओं में अपना स्थान पाने में समर्थ नहीं हो जाती हैं। वर्तमान में उच्चतर जातियों द्वारा देश की सिविल एवं सैन्य सेवाओं में निष्कृष्ट किस्म की साम्प्रदायिकता बनी हुई है। सेवायें कुछेक समुदायों का एकाधिकार बन गई हैं। जब निम्न वर्ग जिन्हें वर्तमान में सेवाओं से वर्जित किया हुआ है इस एकाधिकार को माँग द्वारा समाप्त करने का प्रयास कर रहा है तो उन्हें साम्प्रदायिक कहकर उनकी निन्दा की जा रही है। अनुसूचित जाति संघ इस देश के मामलों में विशेष अधिकार रहित वर्ग द्वारा अपना उचित स्थान प्राप्त करने की माँंग के विरुद्ध उठने वाले किसी भी अनुचित तर्क को स्वीकार नहीं करेगा।

  2. अनुसूचित जाति संघ का विश्वास है कि इस देश में उच्च एवं निम्न वर्गों के मध्य पहले ही बहुत बड़ा अंतर है। इस अंतर के कारण उनमें पहले से बड़ी शत्रुता पनप चुकी है। श्री गांधी की हत्या के पश्चात् वर्ष 1948 में भारत के कई हिस्सों में निम्न वर्गों के सदस्यों द्वारा उच्च वर्गों के विरुद्ध हत्या, आगजनी और लूट के मामले यह दर्शाते हैं कि इस शत्रुता, घृणा की जड़ कितनी गहरी है। अनुसूचित जाति संघ का दृढ़ विश्वास है कि इस शत्रुता को जड़ से समाप्त करने के लिए निम्न वर्गों को उच्च शिक्षा दी जाये तथा उनके लिए सेवाओं में भर्ती होने के मार्ग को खोलना ही इस समस्या का एकमात्र हल है। उच्च जातियों एवं निम्न जातियों के मध्य जन्म आधारित कृत्रिम भेद शीघ्र ही समाप्त हो जाना चाहिए। परन्तु यह तब तक समाप्त नहीं हो सकता जब तक कि शिक्षा के मामले में निम्न वर्गों का उन्नयन उच्च वर्गों के स्तर के बराबर नहीं कर दिया जाता।