386 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जनसंख्या को कम करने के उद्देश्य के लिए संघ लोगों में जन्म-नियंत्रण के पक्ष में गहन प्रचार करने का समर्थन करता है। यह देश के विभिन्न हिस्सों में जन्म नियंत्रण क्लीनिक खोलने का भी समर्थन करेगा। यह देश में जनसंख्या वृद्धि की बढ़ती दर को इतनी गंभीर बुराई मानता है कि यह इसको नियंत्रित करने के लिए कठोर उपायों का समर्थन करने में कोई संकोच नहीं करेगा।
उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य के लिए अनुसूचित जाति संघ किसी रूढि़वादी परम्परा या किसी पद्धति का अनुपालन नहीं करेगा। औद्योगिक उपक्रम की पद्ध ति एक ऐसा मामला है जो समय एवं परिस्थितियों की माँग द्वारा विनियमित किया जाएगा। जहाँ उद्योग को राष्ट्रीय उपक्रम बनाना संभव एवं अनिवार्य होगा वहाँ अनुसूचित जाति संघ राष्ट्रीय उपक्रम का समर्थन करेगा। जहाँ निजी उपक्रम संभव है और राष्ट्रीय उपक्रम अनिवार्य नहीं है वहाँ निजी उपक्रम की स्वीकृति प्रदान की जायेगी। इस देश के लोगों की गरीबी को देखते हुए अधिक उत्पादन तथा निरन्तर अधिक उत्पादन प्राथमिक एवं सर्वोपरि शर्त होने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं हो सकता है। उद्योग की पूर्व संकल्पित पद्धति को प्राथमिक या सर्वोपरि नहीं माना जा सकता है। गरीबी का उपचार अधिक उत्पादन है न कि उत्पादन की पद्धति फिर भी अनुसूचित जाति संघ द्वारा एक बात अवश्य निश्चित की जानी चाहिए। उत्पादन की प्रत्येक योजना अनुसूचित जाति संघ को देखते हुए बनाई जानी चाहिए जिसकी केवल एक अधिभावी शर्त हो कि कार्यशील वर्ग का शोषण न होने पाए।
यद्यपि संघ की राय में देश में तेज़ी से औद्योगीकरण अत्यन्त अनिवार्य है फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव अनिवार्य रूप से कृषि ही रहनी चाहिए। भारतीय कृषि की पुनर्संरचना को ध्यान में रखे बिना उत्पादन बढ़ाने की प्रत्येक योजना का परिणाम निराशाजनक ही होगा।
संघ का मत है कि कृषि में उत्पादन बढ़ाने के लिए निम्नलिखित योजना को अपनाया जाना चाहिए :-
( i ) कृषि का मशीनीकरण होना चाहिए। भारत में कृषि तब तक समृद्ध नहीं
हो सकती जब तक खेती की पद्धति प्राचीन रहेगी।
( ii ) मशीनों द्वारा खेती संभव बनाने के लिए छोटे जोतक्षेत्रों के स्थान
पर बड़े फार्मों पर खेती की जाए।
( iii ) उपज को बढ़ाने के लिए पर्याप्त खाद और उन्नत बीजों की आपूर्ति
का प्रावधान होना चाहिए।