46. अनुसूचित जाति का उद्धार घोषणा-पत्र का प्रारूप - Page 409

392 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

( i ) सेना पर व्यय में कमी;

( ii ) नमक-कर को पुनः लागू करना;

( iii ) उत्पादन राजस्व की बचत ;

( iv ) बीमा का राष्ट्रीयकरण

  1. भारत सरकार का कुल राजस्व लगभग 350 करोड़ रुपये है और इसमें 50 प्रतिशत से अधिक का राजस्व अर्थात् लगभग 180 करोड़ रुपये वार्षिक का व्यय सेना पर होता है। ऐसे देश में जहाँ लोग भूख से मर रहे हैं वहाँ सेना पर यह व्यय बहुत अधिक है। घोषणा-पत्र में दिये गये सुझाव के अनुसार कश्मीर मामले का निपटान और विदेश नीति में परिवर्तन करने और अन्य विदेशी राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने के आधार पर रक्षा व्यय में 50 करोड़ रुप्ये प्रतिवर्ष की कटौती करने में कोई जोखिम नहीं है।

  2. ऐसा कोई कारण नहीं है कि नमक-कर दुबारा न लगाया जाए। नमक-कर को समाप्त करना केवल भावनावश लिया गया पफैसला था। इससे नमक सस्ता नहीं हुआ। इसके बजाय नमक मंहगा हो गया है। इससे केवल यह हुआ कि राज्य को राजस्व के मूल्यवान स्रोत की हानि हुई जिससे 11 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व अर्जित होता था और इससे देश को विकास की ओर अग्रसर करने में राज्य को गंभीर रूप से अक्षम हो गया है। यदि कर इस दर पर लगाया जाता है जिससे कर के रूप में 30 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष अर्जित हों तो भी जनता पर पड़ने वाला कर का बोझ न के बराबर होगा।

  3. नशाबन्दी महज पागलपन है। इसको बढ़ावा दिये जाने को ही केवल नहीं रोकना होगा अपितु इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। शराब का उत्पादन कुटीर उद्योग बन गया है। पूर्व में केवल पुरुष शराब पीते थे। अब महिलाएँ एवं बच्चे भी पीते हैं क्योंकि शराब का उत्पादन प्रत्येक घर में महिलाओं एवं बच्चों की उपस्थिति में होता है। इससे अपराध को बढ़ावा मिला है और निम्न वर्गों का निकृष्टतम रूप से नैतिक पतन हुआ है।

  4. राज्य के संसाधनों को बनाये रखने की दृष्टि से यह एक बहुत बड़ी हानि है। भाग ‘क’ राज्यों का वर्ष 1945-46 में उत्पादन राजस्व 51.67 करोड़ रुपये था। वर्ष 1950-51 में यह 25.23 करोड़ रुपये था। वर्ष 1951-52 के लिए बजट अनुमान 24.95 करोड़ रुपये है। वर्ष 1945-46 के आँकड़ों में विभाजन पूर्व पंजाब एवं बंगाल सम्मिलित हैं। किन्तु स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि भाग ‘क’ राज्यों में नशाबन्दी