46. अनुसूचित जाति का उद्धार घोषणा-पत्र का प्रारूप - Page 410

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के कारण प्रतिवर्ष 25 करोड़ रुपये तक की हानि हुई है। तथापि इसमें शराब बन्दी न होने की स्थिति में उत्पादन राजस्व की संभावित वृद्धि को सम्मिलित नहीं किया गया है।

  1. बम्बई के लिए वर्ष 1946-47 में उत्पादन राजस्व 9.74 करोड़ रुपये था। वर्ष 1950-51 में यह 1.20 करोड़ रुपये था और वर्ष 1951-52 के लिए बजट अनुमान 1.05 करोड़ रुपये है। इस प्रकार उत्पादन राजस्व में लगभग 8.7 करोड़ रुपये की हानि हुई है।

  2. मद्रास में वर्ष 1945-46 में उत्पादन राजस्व 16.80 करोड़ रुपये था। वर्ष 1950-51 में यह घटकर 0.50 करोड़ रुपये रहे गया। वर्ष 1951-52 के लिए बजट अनुमान 0.36 करोड़ रुपये है। इस प्रकार शराब-बन्दी के परिणामस्वरूप उत्पादन राजस्व में 16 करोड़ रुपये की हानि हुई है।

  3. उत्तर प्रदेश में वर्ष 1947-48 में उत्पादन राजस्व 7.06 करोड़ रुपये था। वर्ष 1950-51 में यह घटकर 0.50 करोड़ रुपये रह गया। वर्ष 1951-52 के लिए बजट अनुमान 5.84 करोड़ रुपये है। इस प्रकार 1.2 करोड़ रुपये की हानि हुई है।

  4. मध्य प्रदेश, पंजाब और बंगाल में भी उत्पादन राजस्व में गिरावट प्रकट हुई है।

  5. केवल बम्बई एवं मद्रास के लिए उत्पादन राजस्व में हानि लगभग 25 करोड़ रुपये आकलित की गई है जो कि भाग ‘क’ राज्यों के सम्मिलित उत्पादन राजस्व में अनुमानितः गिरावट भी है।

  6. ये आँकड़े अपूर्ण हैं। इनमें भाग ‘ख’ राज्यों का कोई आँकड़ा सम्मिलित नहीं है। शराब बन्दी नीति को अपनाने के परिणामस्वरूप इसके कार्यान्वयन पर किये गये व्यय के आँकड़े भी इसमें सम्मिलित नहीं हैं।

  7. इक्विटी के दृष्टि से शराबबन्दी का कोई औचित्य नहीं है। नशाबन्दी की लागत सामान्य नागरिकों द्वारा वहन की जा रही है। एक या दो लाख शराब के आदी व्यक्तियों, जिनको कभी सुधारा नहीं जा सकता, के सुधारने की कीमत आम नागरिक को क्यों चुकानी पड़े? सामान्य जन को शराबबन्दी की लागत का भुगतान क्यों करना पड़े जबकि नागरिकों की अन्य जरूरतें जैसे शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य में सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। धन का प्रयोग विकास योजनाओं के लिए क्यों न किया जाए? किसको अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए - शराबी को या भूखे को ? ये प्रसंगानुकूल प्रश्न हैं जिनका कोई उत्तर नहीं है सिवाय अहंकार एवं दुराग्रह