396 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
स्वतंत्र प्रत्याशियों, जो किसी पार्टी से संबंधित नहीं हैं, का समर्थन नहीं करेगा।
दूसरी बात अनुसूचित जाति संघ पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जनजातियों के सहयोग से कार्य करना पसन्द करेगा। क्योंकि उनकी स्थिति प्रायः अनुसूचित जातियों की भांति हो। दुर्भाग्य से इन वर्गों में राजनीतिक जागरूकता इस स्तर तक नहीं आयी है जो अनुसूचित जातियों में पिछले बीस वर्षों के दौरान अनुसूचित जाति संघ की राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियों के कारण आयी है। स्वतंत्र भारत के संविधान ने पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जन-जातियों एवं अनुसूचित जातियों को वस्तुतः देश का प्रमुख नागरिक बना दिया है। अब तक हिन्दू जाति के अल्पसंख्यकों ने अपने आपको देश का शासक बनाया हुआ था। अनुसूचित जाति संघ को भय है कि पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जनजातियों में जागरूकता की कमी के कारण वे हिन्दू जाति के अल्पसंख्यकों के शिकार हो जायेंगे और स्वतंत्र रूप से अपनी इच्छानुसार कार्य करने की बजाय उनके गुलाम बने रहेंगे। अनुसूचित जाति संघ की पहली प्राथमिकता इन वर्गों को अपने पैरों पर खड़ा करने को है। यदि वे चाहें तो अनुसूचित जाति संघ अपना नाम बदल कर पिछड़ी जाति संघ करने के लिए तैयार है ताकि साझे संगठन में दोनों वर्गों को सम्मिलित किया जा सके। यदि यह संभव नहीं होगा तो अनुसूचित जाति संघ ऐसे संगठनों से कार्यशील मैत्री बनाने के लिए तैयार एवं इच्छुक रहेगा।
अन्य राजनीतिक दलों के संबंध में, अनुसूचित जाति संघ का रवैया आसानी से समझा जा सकता है। अनुसूचित जाति संघ हिन्दू महासभा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी प्रतिक्रियावादी पार्टियों के साथ गठबंधन नहीं करेगा।
अनुसूचित जाति संघ कम्युनिस्ट पार्टी जैसी पार्टी से भी नहीं करेगा क्योंकि उसका उद्देश्य व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं संसदीय प्रजातंत्र को समाप्त कर उसके स्थान पर तानाशाही को स्थापित करना है।
अनुसूचित जातिसंघ एकदलीय शासनतंत्र में विश्वास नहीं रखता है और इसलिए वह ऐसे किसी राजनीतिक दल में सम्मिलित नहीं होगा जो पहले से ही सर्वसत्ता वादी हो और किसी विपक्षी पार्टी को बढ़ने की स्वीकृति न देती हो।
अनुसूचित जाति संघ राजनीतिक दलों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी का भी समान रूप से विरोध करता है। अनुसूचित जाति संघ का मानना है कि दो पार्टियाँ होनी चाहिएं। केवल इसी से राज्य को स्थायित्व एवं व्यक्ति को स्वतंत्रता प्राप्त हो सकती है। संघ इस देश में दो पार्टी प्रणाली लाने के लिए संघर्ष करेगा। लेकिन इस संकल्पना को अब से आगामी आम चुनावों तक की अल्पवधि में साकार