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श्री कामथ का संसद में प्रश्न
नई दिल्ली 12 अक्तूबर : प्रधानमंत्री द्वारा कल सांयकाल संसद में डॉ. अम्बेडकर एवं उनके बीच हुए पत्राचार के अंश डॉ. अम्बेडकर से अनुमति लिए बिना तथा उनके बिना सूचना दिये, पढ़ने के औचित्य के संबंध में आज प्रातः श्री एच.वी. कामथ द्वारा संसद में प्रश्न पूछा गया।
हर्ष-ध्वनि के बीच प्रथम पंक्ति में डॉ. अम्बेडकर द्वारा अपना स्थान ग्रहण किए जाने के पश्चात् श्री कामथ ने प्रश्न पूछा और कहा कि क्या डॉ. अम्बेडकर को पत्राचार पर टिप्पणी करते हुए वक्तव्य देने की सहमति दी जाएगी। उपाध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी बात स्वयं कहे। उन्होंने इंगित किया कि उसने डॉ. अम्बेडकर को अपना वक्तव्य देने के लिए कल सांय 6 बजे का समय नियत किया था। उस समय डॉ. अम्बेडकर अपने स्थान पर नहीं थे और प्रधानमंत्री कुछ संगत दस्तावेज पढ़ना चाहते थे और उनको अनुमति प्रदान की गई। किसी सदस्य को कोई विशेष नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है।
अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि जब प्रातः उन्होंने कक्ष छोड़ा था उस समय वे पूरी तरह से आश्वस्त थे कि उन्होंने सदन एवं अध्यक्ष के समक्ष यह व्यक्त कर दिया था कि वे सांय 6 बजे वक्तव्य देने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने यह नहीं कहा था कि वह प्रधानमंत्री द्वारा सांय 6 बजे पत्राचार पढ़ने के कारण आहत हैं। ‘‘यह पूरी तरह जानते हुए कि मैंने प्रातः स्पष्ट रूप से कहा था कि मैं आपके अवलोकनों को नहीं मानूँगा एवं सांय 6 बजे वक्तव्य नहीं दूँगा।’’
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डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा -
‘‘प्रधानमंत्री के पत्रों को पढ़ना न्यायोचित था अथवा नहीं मैं इस मामले को पधानमंत्री और आप पर छोड़ता हूँ क्योंकि मेरे पास गलत छाप को सही करने के अन्य साधन मौजूद हैं।’’
प्रसंग को समाप्त करते हुए उपाध्यक्ष ने कहा कि अपना विचार बदलने और वक्तव्य देना, विशेषकर जब मैंने एक बार वक्तव्य के लिए सांय 6 बजे का समय नियत किया हुआ है, यह सदस्य पर निर्भर करता है।’’ ख्1,
- दिनांक 11.10.1951 के द टाइम्स ऑफ इंडिया में दिनांक ‘11’ गलत प्रतीत होता हो - संपदाक
पुनर्मुद्रित : खैरमोरे, खंण्ड 10, पृष्ठ 119-121।