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रखते हुए यह बैठक उनकी पुरजोर निन्दा करती है और उस निन्दा की अभिव्यक्ति के रूप में उनको जलाने का संकल्प करती है तथा हिन्दू समाज के पुनर्गठन का आधार बनाने के लिए निम्नलिखित अधिकारों की घोषणा करती है।
उस घोषणा में कहा गया कि सभी हिन्दुओं को एक वर्ण का समझा जाना चाहिए और उन्हें उसी रूप में पहचाना तथा पुकारा जाना चाहिए तथा ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए जिसमें ब्राह्मण क्षत्रिय आदि जैसे जाति सूचक शब्दों का प्रयोग निषिद्ध हो।
महाद में वह स्थान जहां मनुस्मृति जलाई गई थी
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चित्र
मनुस्मृति की होली जलाना नितांत साशय था। हमने इसकी होली इसलिए जलाई कि हम इसे उस अन्याय का प्रतीक समझते हैं जिसके नीचे हम सदियों से पिसते आए हैं।
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-डॉ. बी.आर. अम्बेडकर