50. चुनाव याचिका। - Page 430

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मतदाताओं को न केवल गुमराह किया है बल्कि हिन्दू जाति के मतदाताओं

की साम्प्रदायिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी किया है। विशेष रूप से

प्रतिवादी सं. 2 ने हिन्दू जाति के मतदाताओं की साम्प्रदायिक भावनाओं को

जागृत कर उनमें भय की भावना सृजित की है कि यदि वे नियमानुसार

अपने मतों को विभाजित करेंगे तो उनका हित खतरे में पड़ जाएगा।

  1. याचिकादाताओं का कहना है कि प्रतिवादी सं. 1 व 2 ने कथित बम्बई शहर

उत्तरी निर्वाचन-क्षेत्र के हिन्दू जाति के मतदाताओं के मन में न केवल

खतरे की भावना उत्पन्न की है परन्तु अधिनियम की धारा 54 के प्रावधानों

को स्पष्ट करने में असपफल रहे हैं। इस धारा में यह विहित है कि चुनाव

के प्रिणामों को किस प्रकार निर्धारित एवं घोषित किया जाएगा।

  1. इस प्रकार प्रतिवादी सं. 1 व 2 ने नियम का गलत निरूपण किया है और

हिन्दू जाति के मतदाताओं को गुमराह कर यह सोचने पर विवश किया है

कि प्रत्येक परिस्थिति में यह संभव है कि हिन्दू जाति समुदाय के प्रत्याशियों

का बहिष्कार करके अनुसूचित जाति के प्रत्याशी दोनों सीटों के लिए चुने

जा सकते हैं।

  1. याचिकादाताओं का कहना है कि प्रतिवादी सं. 1 व 2 द्वारा इस प्रकार से

हिन्दू जाति के मतदाताओं को भ्रमित किया गया है और जानबूझकर तथा

धोखे से उनको अपने पक्ष में मत डालने के लिए फुसलाया गया है।

  1. याचिकादाता निवेदन करते हैं कि पूर्ववर्ती पैराओं में जो कुछ कहा गया है

उसे दृष्टिगत रखते हुए यह कहा जा सकता है कि प्रतिवादी सं. 1 और

2 के पास अपने एजेन्ट और अन्य व्यक्ति हैं जो उनकी ओर से उनके

लिए कार्य करते हैं, उन्होंने अपने चुनाव अभियान के दौरान अनुचित प्रभाव

डाला है, जिसके अंतर्गत उन्होंने अधिनियम की धारा 123(2) के अर्थों के

भीतर कि मतदाताओं के मत डालने की स्वतंत्रता का अतिक्रमण किया है

और यह कि इस प्रकार उक्त अधिनियम की धारा 100( i )(क) के अनुसार

यह चुनाव निष्पक्ष चुनाव नहीं है।

  1. याचिकादाताओं ने आगे कहा कि प्रतिवादी सं. 1 व 2 जानते थे कि दोनों

मत अपने पक्ष में प्राप्त करने का प्रचार करने से भी उनको कोई लाभ

नहीं मिल सकता है। फिर भी उन्होंने अपने प्रचार में इसी बात का आग्रह

किया क्योंकि वे याचिकादाता 1 व 2 के भविष्य को आहत करने के लिए

विद्वेषपूर्ण भावना से प्रेरित थे।