50. चुनाव याचिका। - Page 431

414 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. याचिकादाताओं ने निवेदन किया है कि उपर्युक्त अनुच्छेद 10 में

उल्लिखितानुसार प्रतिवादी सं. 1 एवं 2 के पक्ष में मतदाताओं द्वारा काफी

संख्या में दोहरा मतदान किया जाना इस तथ्य का प्रमाण है कि प्रतिवादी

सं 1 व 2 द्वारा कथित निर्वाचन-क्षेत्र में डाला गया अनुचित प्रभाव चुनाव

के समय अत्यधिक व्याप्त था।

  1. अतः याचिकादाताओं ने कहा कि चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने जैसे भ्रष्ट

आचरण, जो चुनाव के समय अत्यधिक से व्याप्त था, के कारण निष्प्क्ष

चुनाव नहीं हुआ और इस प्रकार इस चुनाव को पूर्णतया अमान्य घोषित

किया जाए।

  1. याचिकादाताओं ने जन-प्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 117 की

अपेक्षानुसार याचिका की लागत के लिए प्रतिभूति के रूप में चुनाव आयोग

के सचिव के पक्ष में भारतीय रिजर्व बैंक में 1000 रुपये जमा करवाये हैं।

उक्त राशि को जमा करवाने की मूल रसीद इसके साथ संलग्न है और

‘छ’ के रूप में चिन्हित है।

  1. जन-प्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 83(2) की अपेक्षानुसार प्रतिवादी

सं. 1 एवं 2 द्वारा किये गये भ्रष्ट आचरणों के विवरण की सूची इस या­

चका के साथ संलग्न है तथा ‘ज’ के रूप में चिन्हित है।

  1. कि यह याचिका जन-प्रतिनिधि (चुनाव संचालन एवं चुनाव याचिका) नियम,

1951 के नियम 119(ख) के अन्तर्गत स्वीकृत समय के भीतर दायर की जा

रही है, उक्त नियम के नियम 112 के उप-नियम (1) के अन्तर्गत खर्चे की

रिटर्न 11 मार्च, 1952 तक भरी जानी चाहिए, जो समाप्त हो चुकी है।

  1. याचिकादाता सं. 2 इस बात की अनुमति प्रदान किए जाने के लिए निवेदन

करते हैं कि इस याचिका में उल्लिखित आधार के अतिरिक्त अन्य कोई

कारण भी प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की जाए।

अतः याचिकादाता निवेदन करते हैं :

(क) कि याचिका पर विचार करने के लिए एक चुनाव न्यायधिकरण

नियुक्त किया जाए;

(ख) कि बम्बई शहर उत्तरी संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र से लोकसभा के 3

जनवरी, 1952 को हुए चुनाव को पूर्णतया अमान्य घोषित किया

जाए;