50. चुनाव याचिका। - Page 436

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में अपनी याचिका के संबंध में तर्क देते हुए श्री अम्बेडकर ने घोषित किया कि मतदाताओं में यह भय उत्पन्न कर साम्प्रदायिक भावनाओं को जागृत करना कानून की घोर अवहेलना है कि यदि मतों का बंटवारा होता है तो उनका प्रतिनिधित्व नहीं होगा।

वे साम्प्रदायिक प्रचार का उल्लेख कर रहे थे, जो डॉ. जी.बी. देशमुख, जिनको उन्होंने 17 प्रत्याशियों के स्वतंत्र उम्मीदवारों के समूह के नेता के रूप में बताया था, द्वारा बम्बई शहर के उत्तरी निर्वाचन क्षेत्र में किया गया था।

डॉ. अम्बेडकर ने कहा ‘‘इससे घटिया प्रचार नहीं हो सकता है और इसके साथ ही उन्होंने यह कहा कि हिन्दू जाति की मानसिकता का स्पष्ट अनुभव हो चुका है, जो यह नहीं चाहते कि अस्पृश्नीय जन विधानमण्डल में महत्वपूर्ण पदों को संभाले। इस संबंध में मोन्टैग चैम्सपफोर्ड सुधारों में विशेष प्रावधान किया गया था। जन-प्रतिनिधि अधिनियम में भी इसी प्रकार का प्रावधान है।’’

.....याचिकादाता ने तर्क देते हुए कहा कि डॉ. देशमुख ने मतदाताओं को अधिनियम की धारा 54 के प्रावधानों से विमुख किया है जब कि कम्युनिस्ट प्रत्याशी श्री एस.ए. डांगे ने धारा 63 का निष्प्रभावी करने का प्रचार करते हुए कानून का तिरस्कार किया है। उसने दोनों प्रतिवादियों पर भ्रष्ट आचरण अपनाने एवं मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालने का आरोप लगाया।

मतों का निपटान
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डॉ. अम्बेडकर ने प्रतिवेदन किया कि दो मतों में से एक का निपटान मतदाताओं या प्रत्याशियों की इच्छा पर नहीं छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि दूसरे मत का निपटान धारा 79(घ) द्वारा विनियमित होता है जिसमें मतदाताओं को विकल्प दिया जाता है कि मतदान करें या न करें क्योंकि भारत में मतदान अनिवार्य नहीं था। उन्होंने निम्नलिखित मुद्दे उठाये : (1) मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र था। (2) वह मतदान केन्द्र पर जाकर अपने दोनों मत-पत्र प्राप्त कर उनको बाँट सकता था। (3) वह उनमें से एक का प्रयोग कर दूसरा सत-पत्र पीठासीन अधिकारी को वापिस कर सकता था (4) एक मतदान-पत्र का प्रयोग कर दूसरे को नष्ट कर देना गैर-कानूनी और धारा 136(ड.)(च) के अनुसार अपराध है। (5) एक मतपत्र मतदान पेटी में डालना तथा दूसरा अपने साथ ले जाना धारा 135 के अनुसार गैर-कानूनी होगा, और (6) दोनों मतपत्र एक ही पेटी में डालना भी नियम