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के अधिकार को स्थापित करने में उनकी सहायता करना चाहती है। परंतु अस्थायी व्यादेश को ध्यान में रखते हुए सरकार असहाय है और चाहती है कि अछूतों को इस समय सत्याग्रह आरंभ नहीं करना चाहिए।
जब डॉ. अम्बेडकर ने सारी स्थिति की समीक्षा की और प्रतिनिधियों को परामर्श दिया कि यदि वे अपने कार्य के परिणामों के लिए तथा कारावास की सजा भुगतने और अन्य दुःखों को झेलने के लिए प्रसन्नतापूर्वक तथा स्वेच्छया तैयार हैं, तो वे सिविल न्यायालय के व्यादेश के विरुद्ध सत्याग्रह करें, तो पूरा सम्मेलन विषय समिति में बदल गया।
सम्मेलन की भावना तत्काल सत्याग्रह आरंभ करने के पक्ष में थी और अध्यक्ष के लिए ऐसे किसी भी वक्ता को जो सत्याग्रह को स्थगित करने के पक्ष में था, सुनना मुश्किल था।
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तत्पश्चात डॉ. अम्बेडकर ने सुझाव दिया कि मनोभाव की गहनता को सही तरीके से जानने के लिए उन प्रतिनिधियों से, जो सत्याग्रह के पक्ष में हैं, कहा जाए कि वे सत्याग्रह करने हेतु वे अपनी लिखित सहमति दें। तदनुसार, सत्याग्रह करने के इच्छुक प्रतिनिधियों का पंजीकरण प्रारंभ किया गया, और एक घंटे के अंदर, 3,884 प्रतिनिधियों ने सत्याग्रह करने के लिए तैयार व्यक्तियों के रूप में अपने नाम पंजीकृत करवा लिए।
कलक्टर को सूचित किया गया कि सम्मेलन सत्याग्रह के पक्ष में है। यह सुनकर कलक्टर ने सम्मेलन को व्यक्तिगत रूप से संबोधित करने की इच्छा व्यक्त की।
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सत्याग्रह सम्मेलन दोपहर बाद 5 बजकर 30 मिनट पर आरंभ हुआ, जब श्री हुड, कलक्टर, जिनके साथ पुलिस अधीक्षक भी थे, सम्मेलन में उपस्थित हुए। कलक्टर ने बैठक को मराठी में संबोधित किया। श्री हुड ने कहा : ‘‘मैं जानता हूं कि आप सब इस सम्मेलन में क्यों एकत्र हुए हैं। मैं यह भी जानता हूँ कि यदि मैं आपको सत्याग्रह को स्थगित करने का परामर्श दूंगा तो आप सब इस पर अत्यधिक खेद प्रकट करेंगे क्योंकि आप पिछले तीन महीनों से इसके लिए तैयारी कर रहे हैं।