28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तथापि, आप सब जानते हैं कि बंबई विधान परिषद ने इस आशय का एक संकल्प पारित किया है कि ‘‘दलित वर्गों’’ को सार्वजनिक तालाबों और स्कूलों में प्रवेश करने दिया जाए और बंबई सरकार ने तद्नसुर अनुदेश दिए हैं तथा स्थानीय बोर्ड को भी ऐसा ही करने का परामर्श दिया है। श्री हुड ने कहा कि सरकार उनको तालाब में प्रवेश करने देने के लिए बिल्कुल तैयार है, परंतु 10 दिन पहले एक नई घटना हो गई है। स्पृश्यों ने ‘‘अस्पृश्यों’’ के विरूद्ध एक मुकदमा दायर कर दिया है जिसमें दावा किया गया है कि तालाब गैर-सरकारी है और उनके पक्ष में एक अस्थायी निषेधाज्ञा मंजूर कर दी गई है।
‘‘मैं जिले के कलक्टर के नाते आपसे कह रहा हूं और मैं सरकार की ओर से आपको आश्वासन देना चाहता हूं कि सरकार ‘‘अछूतों’’ की तरफ है और आप से कहना चाहता हूं कि सरकार और मैं आपके मित्र हैं। मुझे यह देखकर अत्यधिक दुःख होता है कि आपमें से कुछ लोग न्यायालय के आदेश का पालन न कर सत्याग्रह करने का इरादा रखते हैं। मैं सोचता हूं कि यह कार्य बहुत हानिकारक होगा। मैं आपको राय देता हूं कि आप अपना पक्ष तैयार करें और संवैधानिक तथा कानूनी तरीके से लड़ें। मैं ईमानदारी से आशा करता हूं कि निर्णय आपके पक्ष में हो सकता है।’’
श्री जबालकर, जो सुबह आ गए थे, ने कहा कि वह सम्मेलन में गैर-ब्राह्मण पार्टी अर्थात् ‘‘अछूतों’’ का संदेश देने के लिए आए हैं कि ‘‘अछूतों’’ को न्यायालय के व्यादेश का पालन करना चाहिए और न्यायालय के निर्णय के बाद सत्याग्रह करना चाहिए।
सू्बेदार घटगे और अन्य वक्ताओं ने कहा कि वे वहां स्पृश्यों के विरुद्ध सत्याग्रह करने के लिए आए थे न कि सरकार के।’’ ख्1,
‘‘तत्पश्चात डॉ. अम्बेडकर कलक्टर को पंडाल से बाहर ले गए। शाम को सात बजे तक एक के बाद एक वक्ता ने सत्याग्रह आरंभ करने का समर्थन किया, और जिन्होंने असंगत बातें कहीं उनकी छी-छी की गई तथा उन्हें प्रश्नों से तंग किया गया। डॉ. अम्बेडकर ने चर्चा को पुनः अगली सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया।
रात में मुख्य-मुख्य आदमी एकत्र हुए, उन्होंने चर्चाएं कीं और न्यायालय में लंबित मामले को ध्यान के रूप में रखते हुए संघर्ष को स्थगित करने का निर्णय लिया परंतु यह निर्णय भी लिया गया कि एक जूलूस में मार्च किया जाए जिसका मार्ग तालाब के इधर-उधर हो। तद्नुसार यह निर्णय जिलाधीश को सूचित किया गया।
- द इंडियन नेश्नल हेराल्ड, दिनांक 31 दिसम्बर, 1927।