428 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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मैं आपका जीवन बचाने के लिए तैयार हूँ बशर्ते..............
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‘‘वर्ष 1955 के प्रथम तीन महीनों के दौरान ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन लंदन के मॉरिस ब्राउन एवं फ्रांसिस वाटसन ने भारत का दौरा किया, भारत में भ्रमण करते उन्होंने ऐसे लोगों से साक्षात्कार लिया और उसकी रिकॉर्डिंग की, जो उनके विचार में महात्मा गांधी के बारे में जानकारी दे सकते थे और उन्होंने महात्मा के विषय में उनकी स्मृतियों और मतों को रिकॉर्ड किया। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के साथ किये गये साक्षात्कार का संक्षिप्त सार नीचे दिया गया है। कड़ी बनाये रखने के लिए कुछ अन्य की राय भी इसमें रखी गई हैं।
वाचकः हम महात्मा जी, जो एक संत थे, के संबंध में गहराई से चर्चा कर रहे हैं।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वे कभी भी महात्मा नहीं थे। मैं उसको महात्मा कहने से इंकार करता हूँ, वह इस उपाधि के अधिकारी नहीं है। नैतिकता की दृष्टि से भी नहीं।
वाचकः विरोध। भारत की अनुसूचित जाति जो अस्पृश्नीय कहलाते हैं, के रा जनैतिक नेता डॉ. अम्बेडकर, की ओर से विरोध किया गया। गाँधी चाहते थे कि अनुसूचित जातियों को हिन्दू जाति में सम्मिलित कर उनकी असमर्थताओं को दूर कर अस्पृश्नीयता को समाप्त कर दिया जाए। डॉ. अम्बेडकर उनके लिए एक अलग समुदाय के रूप में संरक्षण चाहते थे, जो कि गाँधी के अनुसार नैतिक रूप से गलत एवं राजनीतिक रूप से खतरनाक था। यह एक बहुत ही कड़ा संघर्ष था जिसका अन्त गाँधी के अत्यधिक प्रतिष्ठित अनशन की समाप्ति से हुआ।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ओह! वे लगातार सौदेबाजी कर रहे थेः मैंने कहा ऐसा कदापि नहीं हो सकता। मैं आपका जीवन बचाने को तैयार हूँ, समझे आप, बशर्ते आप कड़े नियम न बनाएँ परन्तु मैं आपका जीवन अपने लोगों की कीमत पर नहीं बचाऊँगा। मैं हमेशा कहता हूँ कि जब भी मैं श्री गाँधी से प्रतिद्वन्द्वी की हैसियत से मिलता हूँ तो मुझे वे एक अलग अनुभूति होती है। मैं उन्हें अधिकतर लोगों से बेहतर जानता हूँ क्योंकि उन्होंने मेरे सामने अपना असली गंतव्य प्रकट किया और में उनके अंदर के मनुष्य को देख सकता था।
वाचकः परन्तु महात्मा के विचारों के प्रति सतर्क रहने के लिए उनके विरोधी होना आवश्यक नहीं है। भारतीय सोशलिस्ट नेता जे.बी. कृपलानी प्रतिद्वन्द्वी नहीं थे। वे वर्ष 1917 से गाँधी की मृत्यु तक उनके अनुयायी रहे।
जे.बी. कृपलानीः उन्होंने महामानव के स्वरूप का खंडन किया, उन्होंने उनके