55. मैं आपका प्राण बचाने के लिए तैयार हूं बशर्तें कि....। - Page 446

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महात्मा बनने के विचार का खंडन किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे एक महात्मा होते तो हमारे लिए उनको समझना संभव नहीं होता। मुख्यतः मेरा विश्वास है कि गाँधी जी का संदेश सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक था परन्तु उस अभिप्राय में आध्यात्मिक नहीं था जिसमें आध्यात्मिकता समझी जाती है। मैं कहना चाहूँगा कि हमारे पास पर्याप्त ईश्वर एवं महामानव (सुपरमैन) हैं। गाँधी एक अच्छे इंसान थे।

धीरेन्द्र मोहन दत्ताः मैंने कभी यह नहीं सोचा कि महात्मा ठेठ भारतीय प्रकृति के थे।

वाचकः डॉ. दत्ता एक विख्यात दार्शनिक हैं, जो अब रवीन्द्र नाथ टेगौर के शैक्षणिक संस्थान-शान्ति निकेतन, जो कि अब विश्व विद्यालय है, में रह रहे हैं।

धीरेन्द्र मोहन दत्ताः आधुनिक हिन्दुओं के लिए वे बहुत ही आदर्श थे, आदर्श जिसका वे अपनी यूरोपीय शिक्षा और अपनी यूरोपीय पृष्ठभूमि के साथ अनुसरण कर सकते थे और वे हिन्दू आदर्शों के साथ बड़ी आसानी से सहानुभूति रख सकते थे परन्तु कट्टरवादी हिन्दू सोचते थे कि वे विश्वासघात कर रहे है ........... कि उनका हिन्दूवाद वास्तविक हिन्दूवाद नहीं है।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर : वे पूर्णतया एक कट्टरवादी हिन्दू थे।

वाचकः डॉ. अम्बेडकर ऐसा सोचते हैं। अधिकतर मुसलमान भी ऐसा ही सोचते हैं, पर सब नहीं। इनमें से कुछ का मानना है कि गाँधी का अस्पृश्नीयता के प्रति रवैया उन्हें सबसे अलग बनाता है।

एच.एन. ब्रेल्स फोर्डः उसने एक बार इस प्रकार कहा कि वे 85 प्रतिशत भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ठीक है यह कुछ-कुछ अतिश्योक्ति लगती है क्योंकि उन्होंने मुसलमानों के एक छोटे से समूह का ही प्रतिनिधित्व किया है। परन्तु जब वह अन्य हिन्दूओं एवं सिखों तथा अस्पृश्यों के संदर्भ में भी उनका बड़बोलापन सही था।

वाचकः हर स्थिति में उनकी बात हर तरह से सही थी। सबसे गंभीर बात यह थी कि वे अस्पृश्यों के मामले को अपना स्वयं का मामला समझते थे। ब्रेलफोर्ड के साथ इस संबंध में उनकी कुछ व्यक्तिगत वार्ता भी हुई थी।

एच.एन. ब्रेलपफोर्डः वे इस संबंध में बड़े मनोवेग से बोलते थे। मेरे विचार से वे अत्याधिक विकट अपराध-बोध की भावना से पीडि़त थे। वह जानते थे कि उनके लोगों इस हिन्दु राष्ट्र ने इन जाति बहिष्कृतों के साथ कैसा व्यवहार किया है; और वे केवल इस कारण से दृढ़ थे कि उनके लोग, हिन्दूराष्ट्र, ही है जो इस मामले को सही दिशा देंगे।

वाचकः गाँधी द्वारा मामलों को सही दिशा दिए जाने का प्रयास उस समय का मामलों को सही दिशा दी जाए एक नया अभियान, एक नया मनोभाव था। डॉ.